Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्य प्रदेश
  • विदेश
  • चुनाव
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो
  • शुक्र, 10 जुलाई 2026
  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • ई-पेपर
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

समुद्र में आ रही भारत की अदृश्य ढाल, रडार भी नहीं पकड़ पाएगा रफ्तार, थर-थर कांपेंगे चीन और पाकिस्तान!

Indian Navy: अत्याधुनिक स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट 'महेंद्रगिरि' 11 जुलाई को भारतीय नौसेना में शामिल होने जा रहा है। 75% स्वदेशी सामग्री से निर्मित यह युद्धपोत रडार से बचकर दुश्मन पर सटीक वार कर सकता है।

  • Written By: अर्पित शुक्ला
Updated On: Jul 10, 2026 | 10:31 PM

आईएनएस महेंद्रगिरि (Image- IANS)

Follow Us
Follow Us:

INS Mahendragiri: अत्याधुनिक स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट (युद्धपोत) महेंद्रगिरि 11 जुलाई को विशाखापत्तनम में यह युद्धपोत भारतीय नौसेना में शामिल होगा। यह कोई सामान्य युद्धपोत नहीं बल्कि बेहद घातक हथियारों से लैस एक चलता-फिरता युद्धक मंच है। इसमें सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियां, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, आधुनिक सेंसर, पनडुब्बी रोधी हथियार तथा एकीकृत कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है।

इस युद्धपोत के नौसैनिक बेड़े में शामिल होने के साथ ही भारत की समुद्री युद्ध क्षमता और आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण कार्यक्रम को नई मजबूती मिलेगी। नौसेना के मुताबिक महेंद्रगिरि का डिजाइन भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है।

आत्मनिर्भर भारत का उदाहरण

वहीं इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने किया है। यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट श्रेणी का नवीनतम स्वरूप है। इसमें कम रडार पहचान, बेहतर जीवटता, उन्नत स्वचालन और आधुनिक युद्ध प्रणालियां शामिल हैं।

सम्बंधित ख़बरें

2050 में दुनिया झेलेगी कोरोना से भी बड़ा कहर! लाखों बच्चे हो जाएंगे अनाथ? रिपोर्ट ने उड़ाई सबकी नींद

बातचीत होगी लेकिन… ईरान ने की अपील पर डोनाल्ड ट्रंप का दो टूक जवाब, बोले- खत्म हो चुका है सीजफायर

कौन हैं 32 साल के नीरज सिन्हा? जिन्हें BJP ने बांकीपुर से बनाया प्रत्याशी, अभिषेक की जगह लड़ेंगे चुनाव

न्यूजीलैंड में PM मोदी का हुआ भव्य स्वागत, खास रौशनी से जगमगाया मशहूर टावर, गदगद हुए प्रधानमंत्री

इससे यह समुद्री युद्ध के सभी आयामों में प्रभावी संचालन करने में सक्षम है। युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और प्रणालियों का उपयोग किया गया है। यह आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता का प्रमुख उदाहरण माना जा रहा है। इसके निर्माण में देशभर के अनेक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों ने योगदान दिया है, जिससे रक्षा औद्योगिक आधार मजबूत हुआ है और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित हुआ है।

क्यों महेंद्रगिरि नाम दिया गया?

महेंद्रगिरि को अत्याधुनिक स्वदेशी हथियारों, सेंसरों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों से लैस किया गया है। यह वायु, सतह और समुद्र में पनडुब्बी रोधी अभियानों को प्रभावी ढंग से अंजाम देने में सक्षम है। इसके अलावा यह समुद्री सुरक्षा, खोज एवं बचाव अभियान, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत कार्यों तथा हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे लंबी अवधि की तैनाती के लिए भी तैयार है।

इस युद्धपोत का नाम पूर्वी घाट की प्रसिद्ध महेंद्रगिरि पर्वतमाला के नाम पर रखा गया है, जो शक्ति, धैर्य और अटूट संकल्प का प्रतीक मानी जाती है। भारतीय नौसेना का यह पहला युद्धपोत है जिसे महेंद्रगिरि नाम दिया गया है। नौसेना के अनुसार यह युद्धपोत बेड़े में शामिल होते ही सक्रिय परिचालन जिम्मेदारियां संभालने में सक्षम होगा।

विदेशी तकनीक पर निर्भरता खत्म

महेंद्रगिरि की तैनाती विशेष महत्व रखती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका और सुरक्षित, स्थिर व समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति प्रतिबद्धता को इससे मजबूती मिलेगी। यह युद्धपोत देश के समुद्री हितों की रक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा तथा क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

एक समय था जब भारत को आधुनिक युद्धपोतों के लिए विदेशी तकनीक और डिजाइनों पर निर्भर रहना पड़ता था। आज स्थिति बदल चुकी है। महेंद्रगिरि इस बात का प्रमाण है कि भारत न केवल अत्याधुनिक युद्धपोतों का निर्माण कर सकता है, बल्कि उन्हें स्वयं डिजाइन करने की क्षमता भी रखता है।

लड़ाकू विमानों को मार गिराने में सक्षम

यह समुद्र में अदृश्य रहकर युद्ध में घातक साबित होता है। महेंद्रगिरि समुद्र में चुपचाप आगे बढ़ सकता है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर अत्यंत घातक प्रहार करने में सक्षम है। इसमें गति और सहनशक्ति का शानदार मेल है। इस फ्रिगेट में आधुनिक कंबाइंड डीजल ऑर गैस (सीओडीओजी) प्रणोदन प्रणाली लगाई गई है। सामान्य गश्ती और लंबी समुद्री तैनाती के दौरान यह ईंधन की बचत करते हुए कुशलतापूर्वक संचालित हो सकता है, जबकि आवश्यकता पड़ने पर गैस टर्बाइन की शक्ति के साथ तेज गति भी प्राप्त कर सकता है।

यही कारण है कि यह युद्धपोत लंबी दूरी तक अभियान चलाने और विभिन्न समुद्री परिस्थितियों में प्रभावी संचालन करने में सक्षम है। युद्धपोत की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बहु-भूमिका क्षमता है। यह एक साथ कई प्रकार के खतरों का सामना कर सकता है। यह दुश्मन के लड़ाकू विमानों को मार गिराने में सक्षम है।

75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री

नौसेना के मुताबिक महेंद्रगिरि में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह आंकड़ा केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की कहानी भी कहता है। इसके निर्माण में देशभर की बड़ी रक्षा कंपनियों के साथ-साथ सैकड़ों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों ने योगदान दिया। अनेक भारतीय उद्योगों ने इसके लिए उपकरण, प्रणालियां, सेंसर, संरचनात्मक सामग्री और अन्य आवश्यक घटक उपलब्ध कराए।

इस प्रक्रिया ने हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए और देश के रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को नई मजबूती प्रदान की। नौसेना के अनुसार महेंद्रगिरि केवल युद्ध के लिए नहीं बनाया गया है। यह मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों, खोज एवं बचाव कार्यों, समुद्री सुरक्षा गश्त और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिशनों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। चाहे समुद्र में फंसे लोगों को बचाना हो, किसी प्राकृतिक आपदा के बाद राहत पहुंचानी हो या हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की उपस्थिति बनाए रखनी हो, महेंद्रगिरि हर प्रकार के मिशन के लिए तैयार है।

यह भी पढ़ें- PM मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा से भारत को बड़ा फायदा! रक्षा, ऊर्जा और यूरेनियम पर हुए अहम समझौते

आज हिंद महासागर क्षेत्र वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और सामरिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख केंद्र बन चुका है। ऐसे समय में एक मजबूत और आधुनिक नौसेना भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। महेंद्रगिरि जैसे अत्याधुनिक युद्धपोत भारतीय नौसेना को दूर-दराज के समुद्री क्षेत्रों में प्रभावी उपस्थिति बनाए रखने, समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी चुनौती का मुकाबला करने की क्षमता प्रदान करते हैं। अपने आदर्श वाक्य ‘माइटी–मैजेस्टिक–मैचलेस’ को चरितार्थ करते हुए महेंद्रगिरि आने वाले दशकों तक हिंद महासागर की लहरों पर भारत की शक्ति, सुरक्षा और गौरव का प्रतिनिधित्व करेगा। -एजेंसी इनपुट के साथ

Indian navy to induct stealth frigate ins mahendragiri in visakhapatnam

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Jul 10, 2026 | 10:31 PM

Topics:  

  • Indian Navy
  • Latest News

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.