IIT इंदौर का कमाल, सेना के जवानों के कदम ताल से बनेगी बिजली, लोकेशन का भी चलेगा पता
IIT इंदौर ने स्वदेशी तकनीक से खास जूते तैयार किए हैं। इन जूतों को पहनकर चलने से न केवल बिजली बन सकती है, बल्कि वास्तविक समय में सैन्य कर्मियों की लोकेशन का भी पता लगाया जा सकता है। जूतों की मदद से वास्तविक समय में सैन्य कर्मियों की लोकेशन भी पता लगाई जा सकती है।
- Written By: राहुल गोस्वामी
(डिज़ाइन फोटो)
इंदौर: इंदौर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) ने फौजियों के लिए एक स्वदेशी तकनीक से खास जूते तैयार किए हैं। इन जूतों को पहनकर चलने से न केवल बिजली बन सकती है, बल्कि वास्तविक समय में सैन्य कर्मियों की लोकेशन का भी पता लगाया जा सकता है। जल्द ही इन खास जूतों को सेना के जवानों को भी मुहैया करा दिया जाएगा, ताकि सरहद या जंगलों की सुरक्षा के दौरान वे अपने इस जूते से तैयार बिजली से जरूरी काम निपटा सकें।
इस बाबत IIT के अधिकारियों ने बताया कि आईआईटी इंदौर ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) को ऐसे जूतों के 10 जोड़ों की पहली खेप मुहैया भी करा दी है। उन्होंने बताया कि इन जूतों को IIT इंदौर के प्रोफेसर आईए पलानी के मार्गदर्शन में विकसित किया गया है।
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अधिकारियों ने बताया ये जूते ट्राइबो-इलेक्ट्रिक नैनोजेनरेटर (टेंग) तकनीक से बनाए गए हैं जिसके कारण इन्हें पहन कर चले गए हर कदम से बिजली बनेगी। उन्होंने बताया कि यह बिजली जूतों के तलों में लगाए गए एक यंत्र में जमा होगी जिससे छोटे उपकरण चलाए जा सकते हैं। इल जुतों में पिजोइलेक्ट्रिक एनर्जी हारवेस्टिंग का प्रयोग किया गया है, जिसे शू एनर्जी हारवेस्टिंग का नाम दिया गया है।
इसके लिए अक खास एनर्जी हारवेस्टर सेंसर बनाया गया है, जो जूते के अंदर ही फिट होगा। इसी के साथ शू कैपेशिटर भी लगा होगा। जैसे ही पैर का पंजा और एंडी चलने के दौरान जमीन को छूएंगे, सेंसर उसे एनर्जी में तब्दील करते हुए कैपेशिटर में एकत्रित कर बिजली बनाएगा।
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अधिकारियों ने बताया कि ‘ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम’ (GPS) और ‘रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन’ (RFID) की तकनीकों से लैस जूतों की मदद से वास्तविक समय में सैन्य कर्मियों की लोकेशन भी पता लगाई जा सकती है। IIT इंदौर के निदेशक प्रोफेसर सुहास जोशी ने कहा कि इन जूतों की नवाचारी खूबियों से सैन्य कर्मियों की सुरक्षा, समन्वय और दक्षता को बल मिलेगा।
वहीं टेंग तकनीक से लैस जूतों का इस्तेमाल अल्जाइमर से जूझ रहे बुजुर्गों, विद्यालय जाने वाले बच्चों और पर्वतारोहियों की लोकेशन पता लगाने में भी किया सकता है। इसके अलावा, ये जूते कारखानों में कामगारों की हाजिरी और उनके काम की निगरानी में मददगार साबित हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि इन जूतों की मदद से खिलाड़ियों के पैरों की हरकतों का सटीक विश्लेषण भी किया जा सकता है जिससे बेहतर प्रशिक्षण के जरिये उनके प्रदर्शन में सुधार लाया जा सकता है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
