अमेरिका के मुंह पर तमाचा, फ्रांस-रूस ने दी राफेल, सुखोई बनाने की तकनीक, भारत में होगा निर्माण
मिग-21 की सेवानिवृत्ति और तेजस Mk1A की देरी के बीच भारत फिर रूस-फ्रांस की ओर बढ़ा, जबकि अमेरिका अविश्वसनीय साझेदार बनकर बाहर हुआ। भारत रूस-फ्रांस की मदद से कई स्वादेसी हथियार बनना की तैयारी में है।
- Written By: अक्षय साहू
सांकेतिक तस्वीर
France-Russia India Arms Agreement: मिग-21 फाइटर जेट लंबे समय तक भारतीय वायु सेना की रीढ़ रहा, लेकिन अब यह सितंबर 2025 में सेवा से पूरी तरह रिटायर होने वाला है। दूसरी ओर, स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान (LCA) तेजस Mk1A अभी भी देरी का सामना कर रहा है और अब इसके इसी साल के अंत तक वायु सेना में शामिल होने की उम्मीद है, जो तय समयसीमा से काफी पीछे है। इस देरी के चलते एक बार फिर भारत को विदेशी फाइटर जेट्स की खरीद की आवश्यकता महसूस हो रही है।
ऐसे में भारत ने दोबारा अपने पुराने रक्षा सहयोगियों रूस और फ्रांस की ओर रुख किया है, जबकि अमेरिका को इस दौड़ में नजरअंदाज कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ के चलते भारत अब अमेरिका को एक अविश्वसनीय साझेदार मानने लगा है।
भारत ने रूस-फ्रांस पर फिर जताया भरोसा
भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान के जखीरे में पहले से ही बड़ी संख्या में रूसी मूल के फाइटर जेट्स हैं। रूस की ओर से पांचवीं पीढ़ी के सुखोई Su-57 ‘फेलॉन’ विमान के लिए पूर्ण प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (ToT) की पेशकश भी की गई है। इसके बावजूद, भारत को अपने स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम को राष्ट्रीय प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाना चाहिए।
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वहीं, भारत और फ्रांस के बीच जून 2025 में हुए समझौके तहत, फ्रांस की हथियार कंपनी डसॉल्ट एविएशन भारत की टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) के साथ मिलकर हैदराबाद में राफेल लड़ाकू विमानों के फ्यूजलेज (धड़) बनाएगी। यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ प्रोग्राम के तहत एक अहम मील का पत्थर माना जा रहा है। इस समझौते के तहत फाइनेंशियल ईयर 2028 से राफेल के प्रमुख फ्यूजलेज हिस्सों के निर्माण के लिए हैदराबाद में एक नई TASL उत्पादन सुविधा स्थापित की जाएगी।
भारत में होगा राफेल का निर्माण
इस समझौते के तहत, विमान के आगे, मध्य और पीछे के फ्यूज़लेज के साथ-साथ साइड व्यू रियर शेल जैसे अलग-अलग पुर्जो का निर्माण शामिल है। यह पहली बार होगा जब राफेल फ्यूज़लेज का निर्माण फ्रांस के बाहर किया जाएगा। इसका उद्देश्य न केवल भारतीय रक्षा क्षेत्र को सशक्त बनाना है, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
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इसके अलावा भारत ने अपने स्वादेशी जीटीआरई कावेरी इंजन पर भी तेजी से काम कर रहा है। भारत एयरो-इंजन के मामले लंबे वक्त से आत्मनिर्भर होने की कोशिश कर रहा है। कावेरी इंजन उसी का एक अहम हिस्सा है। जिसमें फ्रांस मदद कर रहा है।
