
जॉइंट CUAS ग्रिड। इमेज-सोशल मीडिया
India Defence Forces: फिलहाल केंद्र सरकार एक बड़ा एयर डिफेंस शील्ड बनाने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र पर काम कर रही है। इस बीच भारतीय रक्षा बल दुश्मन के किसी भी ड्रोन हमले को नाकाम करने के लिए एक जॉइंट काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम (CUAS) ग्रिड बनाने की दिशा में काम कर रहे। सेनाओं के सभी CUAS सिस्टम को नेटवर्क से जोड़कर बनाया जा रहा जॉइंट CUAS ग्रिड रक्षा बलों के मौजूदा एयर डिफेंस नेटवर्क इंडियन एयर फोर्स के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) से अलग होगा।
जॉइंट CUAS ग्रिड को जॉइंट एयर डिफेंस सेंटर्स (JADC) के साथ मिलकर बनाया जाएगा। इसमें तीनों सेनाएं शामिल होंगी। इसके साथ ही इसे सभी ड्रोन गतिविधियों पर नजर रखने को तैनात किया जाएगा। CUAS ग्रिड का इस्तेमाल दुश्मन या शरारती ड्रोन हमलों पर नजर रखने के लिए किया जाएगा। अगर, सेनाओं के मौजूदा एयर डिफेंस नेटवर्क को छोटे ड्रोन और मानवरहित हवाई सिस्टम की निगरानी का काम भी सौंपा जाता है तो उन पर बहुत अधिक बोझ पड़ जाता है। CUAS ग्रिड पिछले 5 से 10 साल में तीनों सेनाओं की तरफ से खरीदे गए बड़ी संख्या में काउंटर ड्रोन एयर डिफेंस सिस्टम को इंटीग्रेट कर देगा।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी सेना ने तुर्की और चीनी ड्रोन का इस्तेमाल कर भारतीय नागरिक और सैन्य ठिकानों को बड़े पैमाने पर निशाना बनाने की कोशिश की थी। फिर भी भारतीय तीनों सेनाओं और खासकर आर्मी एयर डिफेंस ने उन्हें प्रभावी ढंग से नाकाम कर दिया। भारतीय सेना की L-70 और ZU-23 एयर-डिफेंस गन से छोटे ड्रोन को काफी नुकसान पहुंचाया गया।
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अब सेना आबादी वाले इलाकों में भी एयर डिफेंस गन तैनात करने पर काम कर रही है, जिससे उन्हें दुश्मन ड्रोन और दूसरे विमानों के किसी तरह के हवाई हमलों से बचाया जा सके। ऊपरी स्तर पर सरकार मिशन सुदर्शन चक्र के तहत हवाई हमलों से बचाव के लिए एक शील्ड बनाने पर भी काम कर रही। इसके लिए पहले ही कमेटी बनाई जा चुकी है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ तीनों सेनाओं को इंटीग्रेट करने और उनके बीच तालमेल बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं।






