यात्रा या मौत का सफर! ट्रैवलिंग के लिए बस कितनी सेफ? जैसलमेर और कुरनूल की घटना के बाद उठा सवाल
Kurnool Bus Tragedy: हाल ही में राजस्थान के जैसलमेर और आंध्र प्रदेश के कुरनूल में हुई दर्दनाक बस दुर्घटनाओं ने दर्जनों यात्रियों की जान ले ली। दोनों घटनाओं ने सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- Written By: मनोज आर्या
(डिजाइन फोटो/ नवभारत)
Kurnool Bus Fire Accident: आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में एक प्राइवेट ट्रैवल्स की वोल्वो बस में भीषण आग लग गई। शुक्रवार तड़के कल्लूर मंडल के चिन्नाटकुरु के पास कावेरी ट्रैवल्स (Kaveri Travels) की बस भीषण आग की चपेट में आ गई। आग बस के अगले हिस्से में लगी थी। इसके बाद धीरे-धीरे पूरी बस में फैल गई। कुछ ही देर में पूरी बस जलकर खाक हो गई। अब तक इस दर्दनाक घटना में 12 लोगों की मौत की खबर है। वहीं, कई यात्री गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। बस में आग लगने की वजह क्या है, फिलहाल इसकी जांच की जा रही है।
यह पहली घटना नहीं है, जहां एक चलती बस इस तरह के दर्दनाक हादसे का शिकार हो गई हो। हाल ही में राजस्थान के जैसलमेर (Jaisalmer Bus Fire Accident) में भी इस तह की घटना हुई थी। 14 अक्टूबर को राजस्थान के जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर चलती एसी स्लीपर बस में अचानक भीषण आग लग गई थी। इस हादसे में एक ही परिवार के 5 लोगों समेत 20 यात्रियों की जिंदा जलने से मौत हो गई। वहीं, बाद में दो घायलों ने ईलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इन हालिया घटनाओं ने बस यात्रा की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यात्रा के लिए बस कितनी सेफ?
देश में बढ़ते सड़क हादसों ने एक बार फिर पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। हाल ही में राजस्थान के जैसलमेर और आंध्र प्रदेश के कुरनूल में हुई दर्दनाक बस दुर्घटनाओं ने दर्जनों यात्रियों की जान ले ली। दोनों घटनाएं लगभग मिली-जुली कारणों से हुईं- तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग और सुरक्षा नियमों की अनदेखी। अब सवाल यह है कि क्या भारत में बस यात्रा सचमुच सुरक्षित है?
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राजस्थान के जैसलमेर में हादसे की शिकार हुई बस की तसवीर
हर साल 45,000 से ज्यादा बस हादसे
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल 45,000 से ज्यादा सड़क हादसे बसों से जुड़े होते हैं, जिनमें हजारों लोगों की जान चली जाती है। इनमें से बड़ी संख्या उन बसों की होती है जो या तो फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना चल रही होती हैं या फिर ड्राइवर आराम किए बिना लंबी दूरी का सफर तय करते हैं।
प्राइवेट बसों में सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं
यात्रियों की सुरक्षा के नाम पर अधिकांश प्राइवेट ट्रैवल कंपनियां सिर्फ बीमा का हवाला देती हैं, लेकिन बसों में न तो इमरजेंसी एग्जिट का सही इंतजाम होता है और न ही फायर सेफ्टी उपकरण। सरकारी बसों में स्थिति कुछ बेहतर है, मगर वहां भी रखरखाव और चालक प्रशिक्षण की भारी कमी है। सरकार ने हाल के वर्षों में ‘रोड सेफ्टी वीक; जैसे अभियान चलाकर जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की है पर वास्तविक सुधार अब भी नदारद है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब वक्त आ गया है जब बस ऑपरेटर्स की जिम्मेदारी तय की जाए और यात्रियों की सुरक्षा के लिए सख्त मानक बनाए जाएं।
सुरक्षा को नजरअंदाज कर बस में यात्रा करते लोग
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कौन तय करेगा यात्रियों की सुरक्षा की गारंटी?
ट्रैवल इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि बस यात्रा भारत के लाखों लोगों के लिए अब भी सबसे सस्ता और आसान विकल्प है, लेकिन यदि निगरानी और नियमन मजबूत नहीं किया गया, तो यह सफर जल्द ही खतरा बन सकता है। आखिरकार, जब हर यात्री टिकट के साथ भरोसा खरीदता है तो क्या उसकी सुरक्षा की गारंटी नहीं होनी चाहिए?
