AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का जबाव (फोटो- सोशल मीडिया)
Himanta Biswa Sarma vs Owaisi: देश की सियासत में एक बार फिर धर्म और पहचान की बहस छिड़ गई है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के एक बयान ने सियासी पारा चढ़ा दिया है, जिसमें उन्होंने भविष्य में किसी हिजाब पहनने वाली महिला के प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी की थी। इस पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने दो टूक जवाब देते हुए साफ कर दिया है कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है और यहां का प्रधानमंत्री हमेशा एक हिंदू ही रहेगा।
हिमंता बिस्वा सरमा ने ओवैसी के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए संवैधानिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर अपनी बात रखी। उन्होंने माना कि संविधान किसी को भी प्रधानमंत्री बनने से नहीं रोकता, लेकिन देश की मूल भावना हिंदू सभ्यता से जुड़ी है। सरमा ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि संवैधानिक अधिकार अपनी जगह हैं, मगर उन्हें और देश को पूरा भरोसा है कि भारत का नेतृत्व भविष्य में भी एक हिंदू व्यक्ति के हाथों में ही रहेगा।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र के सोलापुर में एक जनसभा को संबोधित किया। 15 जनवरी को होने वाले नगर निकाय चुनावों के प्रचार के दौरान उन्होंने भारत और पाकिस्तान के संवैधानिक ढांचे की तुलना की। ओवैसी ने कहा कि पाकिस्तान में शीर्ष पद केवल एक समुदाय तक सीमित हैं, जबकि भारत का संविधान सभी को बराबरी का हक देता है। इसी दौरान उन्होंने कहा कि भले ही वह उस दिन को देखने के लिए जीवित न रहें, लेकिन एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला भारत की प्रधानमंत्री जरूर बनेगी।
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ओवैसी के इस बयान को बीजेपी नेताओं ने तत्काल गैरजिम्मेदाराना करार दिया, लेकिन सबसे तीखा हमला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की तरफ से आया। सरमा ने स्पष्ट किया कि भारत की पहचान उसकी सनातन और हिंदू सभ्यता से है। उनका कहना था कि हम हमेशा विश्वास करेंगे कि देश की बागडोर हिंदू के पास ही रहेगी। सरमा का यह पलटवार बताता है कि आने वाले दिनों में यह वैचारिक लड़ाई और तेज होगी। एक तरफ ओवैसी संविधान की दुहाई देकर अपने समुदाय के लिए बड़े सपने देख रहे हैं, तो दूसरी तरफ हिमंता बिस्वा सरमा ने हिंदू राष्ट्र की बात कहकर अपनी पार्टी का रुख साफ कर दिया है।