पतंजलि पर हाईकोर्ट सख्त, ‘अपील वापस लो या जुर्माना भरो’, डाबर के साथ विज्ञापन विवाद में बढ़ा तनाव
Delhi High Court में बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद और पतंजलि फूड्स लिमिटेड को उस वक्त झटका लगा जब डाबर इंडिया के साथ चल रहे च्यवनप्राश विज्ञापन विवाद में कंपनी की अपील पर अदालत ने तीखी टिप्पणी की।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
पतंजलि पर हाई कोर्ट सख्त, फोटो- सोशल मीडिया
Delhi High Court on Patanjali vs Dabur: दिल्ली हाईकोर्ट में बाबा रामदेव को उस वक्त झटका लगा जब डाबर इंडिया के साथ चल रहे च्यवनप्राश विज्ञापन के विवाद में कंपनी की अपील पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि या तो पतंजलि अपील वापस ले या फिर भारी जुर्माना भरने को तैयार रहे।
सिंगल बेंच के आदेश को दी थी चुनौती
जुलाई 2025 में हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने पतंजलि को उसके च्यवनप्राश विज्ञापन में कुछ आपत्तिजनक हिस्सों को हटाने का निर्देश दिया था। इन हिस्सों में कथित रूप से डाबर और अन्य कंपनियों के उत्पादों को नीचा दिखाया गया था। पतंजलि ने इस आदेश को चुनौती देते हुए डबल बेंच में अपील की, जिस पर अब कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
कोर्ट का दो टूक आदेश
जस्टिस हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि सिंगल बेंच के आदेश में पूरा विज्ञापन नहीं हटाने को कहा गया है, बल्कि केवल उन अंशों को हटाने की बात कही गई है जो दूसरी कंपनियों के प्रति अपमानजनक हैं। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि पतंजलि अपनी अपील वापस नहीं लेती तो उस पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाएगा।
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डाबर का आरोप: भ्रामक और अपमानजनक प्रचार
यह विवाद दिसंबर 2024 में तब शुरू हुआ जब डाबर ने पतंजलि के च्यवनप्राश विज्ञापनों के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की थी। डाबर ने आरोप लगाया था कि पतंजलि ने अपने विज्ञापनों में यह दावा किया कि डाबर जैसे उत्पादों में पारा होता है और वे बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। इसके अलावा, पतंजलि ने यह भी प्रचारित किया कि उसका च्यवनप्राश 51 जड़ी-बूटियों से बना है जबकि डाबर के उत्पाद में केवल 40 जड़ी-बूटियाँ हैं।
पतंजलि ने दिया बचाव के लिए तर्क
पतंजलि की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जयंत मेहता ने कोर्ट में तर्क दिया कि कंपनी ने अपने विज्ञापनों में किसी प्रतिद्वंद्वी का नाम नहीं लिया है और दिए गए बयान सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। उन्होंने इस विवाद को वैध प्रतिस्पर्धा और आत्म-प्रचार का हिस्सा बताया। हालांकि कोर्ट इस तर्क से संतुष्ट नहीं हुई।
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23 सितंबर को अगली सुनवाई
कोर्ट की सख्ती को देखते हुए पतंजलि की ओर से अगली कार्रवाई पर विचार करने के लिए समय मांगा गया। इसके बाद अदालत ने सुनवाई को 23 सितंबर तक के लिए टाल दिया है। अब देखना होगा कि पतंजलि अपील वापस लेती है या कोर्ट सख्त कार्रवाई करता है।
