भारत के लिए खतरा बना ईरान-इजरायल युद्ध, कतर से गेल इंडिया की LNG सप्लाई रुकी, देश में बढ़ सकता है गैस संकट
Middle-East में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कतर से भारत आने वाली LNG सप्लाई ठप हो गई है। गेल इंडिया ने ग्राहकों को गैस कटौती की चेतावनी दी है। जानिए आखिर क्यों बंद हुआ दुनिया का सबसे बड़ा गैस प्लांट
- Written By: अभिषेक सिंह
सांकेतिक तस्वीर (सोर्स- सोशल मीडिया)
Qatar LNG Pipeline Close: इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने अब भारत की रसोई और उद्योगों के लिए संकट खड़ा कर दिया है। मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव के कारण भारत की सबसे बड़ी सरकारी गैस कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड (GAIL) को कतर से मिलने वाली तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की सप्लाई फिलहाल पूरी तरह से ठप हो गई है।
कंपनी ने आधिकारिक तौर पर चेतावनी दी है कि यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो उसे अपने ‘डाउनस्ट्रीम’ ग्राहकों यानी उर्वरक, बिजली और अन्य औद्योगिक इकाइयों को दी जाने वाली गैस आपूर्ति में भारी कटौती करनी पड़ सकती है।
पेट्रोनेट एलएनजी ने जारी किया नोटिस
गेल इंडिया ने शेयर बाजार (एक्सचेंज फाइलिंग) को दी गई जानकारी में बताया कि उसके मुख्य सप्लायर पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड (PLL) ने 3 मार्च को एक ‘फोर्स मेजर’ (Force Majeure) नोटिस जारी किया है। ‘फोर्स मेजर’ एक कानूनी प्रावधान है जिसका उपयोग तब किया जाता है जब कोई कंपनी युद्ध, प्राकृतिक आपदा या अनपेक्षित परिस्थितियों के कारण अनुबंध की शर्तों को पूरा करने में असमर्थ होती है।
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यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि कतर और भारत के बीच एलएनजी ले जाने वाले जहाजों का आवागमन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री नेविगेशन प्रतिबंधों के कारण बाधित हो गया है। इसके अतिरिक्त, कतर के रास लाफान में स्थित दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी लिक्विफिकेशन प्लांट भी परिचालन संबंधी कारणों से बंद कर दिया गया है।
सप्लाई कोटा हुआ ‘शून्य’, 4 मार्च से प्रभावी
फाइलिंग के अनुसार, कतर की दिग्गज कंपनी ‘कतर एनर्जी’ ने सैन्य टकराव का हवाला देते हुए पेट्रोनेट को पहले ही आगाह कर दिया था। परिणामस्वरूप, पेट्रोनेट द्वारा गेल को आवंटित किया जाने वाला एलएनजी कोटा 4 मार्च 2026 से शून्य कर दिया गया है।
गेल ने स्पष्ट किया है कि वह वर्तमान में स्थिति का आकलन कर रही है। कंपनी के पास देश भर में लगभग 11,400 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का विशाल नेटवर्क है, जो भारत के गैस ट्रांसमिशन बाजार में 75% हिस्सेदारी रखता है। इस सप्लाई के रुकने से स्टील, सीमेंट और फर्टिलाइजर जैसे बड़े उद्योगों पर सीधा असर पड़ेगा।
वैश्विक ऊर्जा बाजार में हाहाकार
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले से ही अस्थिर है। एशिया में स्पॉट एलएनजी की कीमतें पिछले सप्ताह की तुलना में दोगुनी से भी अधिक हो गई हैं। हालांकि गुरुवार को कीमतें गिरकर 23.80 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (mmBtu) पर आईं, लेकिन यह अभी भी तीन साल के उच्च स्तर के करीब है।
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यह उछाल तब देखा गया जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन से पलटवार किया। इन हमलों ने तेल और गैस सप्लाई के सबसे महत्वपूर्ण मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को असुरक्षित बना दिया है।
दुनिया की लाइफलाइन पर संकट
ऊर्जा बाजार की सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया भर में होने वाले कुल तेल और गैस व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। कतर के रास लाफान प्लांट का बंद होना और टैंकरों का रास्ता बदलना यह दर्शाता है कि अब एलएनजी की वैश्विक प्रतिस्पर्धा और बढ़ेगी, जिससे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए लागत में भारी इजाफा हो सकता है।
आखिर क्या है भारत की तैयारी?
हालांकि गेल ने यह भी कहा है कि अन्य अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से मिलने वाली सप्लाई फिलहाल प्रभावित नहीं हुई है। कंपनी लगातार वैश्विक हालात पर नजर बनाए हुए है और वैकल्पिक व्यवस्था तलाश रही है। लेकिन जानकारों का मानना है कि यदि यह तनाव लंबा खिंचता है, तो भारत को न केवल सप्लाई की कमी बल्कि बढ़ी हुई कीमतों का भी सामना करना होगा।
