Future Warfare Course: भविष्य के युद्धों की तैयारी तेज, 3 अगस्त से शुरू होगा त्रि-सेवा युद्ध पाठ्यक्रम

Indian Armed Forces Course: 3 अगस्त से नई दिल्ली नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में त्रि-सेवा भविष्य युद्ध पाठ्यक्रम शुरू होगा। AI, साइबर वॉरफेयर और आधुनिक सैन्य रणनीतियों पर चार सप्ताह तक मंथन होगा।
Future Warfare Course: Preparations for future wars intensify, tri-services war course to commence from August 3
नई दिल्ली में त्रि-सेवा भविष्य युद्ध पाठ्यक्रम शुरू ,(सोर्स- एआई नीर्मित)
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Defence Ministry Future Warfare Tri-Service Course: भारत की सशस्त्र सेनाएं भविष्य के युद्धों की बदलती चुनौतियों के अनुरूप खुद को तैयार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही हैं। नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में 3 अगस्त से चौथा त्रि-सेवा भविष्य युद्ध पाठ्यक्रम (Future Warfare Course) शुरू होगा, जिसका उद्देश्य आधुनिक युद्ध की बदलती रणनीतियों, नई तकनीकों और उभरते सुरक्षा खतरों पर व्यापक मंथन करना है। चार सप्ताह तक चलने वाले इस पाठ्यक्रम का आयोजन मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ के तत्वावधान में संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र द्वारा किया जा रहा है।

इसमें थल सेना, नौसेना और वायु सेना के अधिकारियों के साथ विभिन्न सरकारी संस्थानों, शिक्षण संस्थानों, उद्योग जगत और सामरिक विशेषज्ञों की भागीदारी होगी। प्रशिक्षण के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर वॉरफेयर, सूचना युद्ध, अंतरिक्ष सुरक्षा, स्वायत्त प्रणालियों और बहु-क्षेत्रीय सैन्य अभियानों जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी। रक्षा मंत्रालय का उद्देश्य भविष्य के युद्ध के बदलते स्वरूप को समझना और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के बीच साझा दृष्टिकोण विकसित करना है।

3 अगस्त से शुरू होगा भविष्य युद्ध पाठ्यक्रम

नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में 3 अगस्त से चौथा त्रि-सेवा भविष्य युद्ध पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। चार सप्ताह तक चलने वाले इस कार्यक्रम का आयोजन मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ के तत्वावधान में संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र द्वारा किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भविष्य के युद्धों की बदलती चुनौतियों के लिए सशस्त्र बलों को तैयार करना है।

तीनों सेनाओं के अधिकारी होंगे शामिल

इस पाठ्यक्रम में भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना के अधिकारियों के अलावा विभिन्न सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों, उद्योग जगत और सामरिक चिंतन संस्थानों के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे। साझा भागीदारी के माध्यम से भविष्य की सैन्य रणनीतियों पर व्यापक दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

AI और साइबर वॉरफेयर पर रहेगा फोकस

प्रशिक्षण के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर युद्ध, सूचना युद्ध और संज्ञानात्मक युद्ध जैसे आधुनिक विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। विशेषज्ञ प्रतिभागियों को इन तकनीकों के सैन्य अभियानों पर पड़ने वाले प्रभाव और उनके उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।

बहु-क्षेत्रीय युद्ध रणनीतियों पर होगी चर्चा

दरअसल इस पाठ्यक्रम में जल, थल, वायु और अंतरिक्ष क्षेत्रों में भविष्य के सैन्य अभियानों, स्वायत्त प्रणालियों, ग्रे-जोन ऑपरेशन और मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस जैसे विषय भी शामिल हैं। प्रतिभागियों को भविष्य के युद्धक्षेत्र में उभरती चुनौतियों, नई सैन्य अवधारणाओं और तकनीकी बदलावों के प्रभाव का विश्लेषण करने का अवसर भी मिलेगा।

संयुक्त सैन्य क्षमता होगी और मजबूत

बता दें कि रक्षा अधिकारियों के अनुसार इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता को और मजबूत करना है। इससे भविष्य की परिचालन चुनौतियों को लेकर साझा समझ विकसित होगी और संयुक्त सैन्य अभियानों की प्रभावशीलता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में अहम पहल

आपको बता दें कि  वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में तेजी से हो रहे बदलावों और आधुनिक तकनीकों की बढ़ती भूमिका को देखते हुए यह पाठ्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम भारतीय सशस्त्र बलों को भविष्य के युद्धों के लिए अधिक सक्षम और तकनीकी रूप से तैयार बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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