सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार, फोटो- सोशल मीडिया
Karnataka Political Dispute: कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी अटकलों और नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने मिलकर एकजुटता का संदेश दिया है। एक साझा प्रेस वार्ता में, दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी एकजुट है और वे हाईकमान के निर्देशों का पालन करेंगे।
नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने करीब एक घंटे तक नाश्ता करने के बाद मीडिया को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि “हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है और भविष्य में भी कोई मतभेद नहीं होंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि “कल से कोई असमंजस नहीं रहेगा। अभी भी कोई असमंजस नहीं है।” सिद्धारमैया ने स्वीकार किया कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स से गलतफहमी पैदा हुई थी। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि पार्टी आलाकमान जो भी तय करेगा, वे उसका पालन करेंगे।
सिद्धारमैया ने विपक्षी पार्टियों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल-सेक्युलर (जेडीएस) पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इन दलों को “झूठे आरोप लगाने की आदत है।” मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर फर्जी अफवाह फैलाने का आरोप भी लगाया।
उन्होंने विपक्षी दलों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाने की बात पर तंज कसा। सिद्धारमैया ने कहा, “उनके पास सिर्फ 60 विधायक हैं, और जेडीएस के पास 18 हैं। वे हमारी संख्या का मुकाबला नहीं कर सकते।” उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस के पास 140 विधायक हैं, और अविश्वास प्रस्ताव लाने की यह कोशिश “एक बेकार की कोशिश” है।
डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने भी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की बातों का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री ने जो भी कहा, मैं उनके साथ हूं। हम मिलकर काम कर रहे हैं।” शिवकुमार ने कहा कि राज्य के लोग पूरा समर्थन दे रहे हैं और वे वादे के मुताबिक काम कर रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है और हाईकमान जो भी कहेगा, वही उनका फैसला होगा। उन्होंने कहा, “हम पार्टी के वफादार सिपाही रहे हैं”। शिवकुमार ने आशा व्यक्त की कि कर्नाटक, मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के नेतृत्व में, 2028 में सरकार दोहराएगा और देश की राजनीति में एक बड़ी भूमिका निभाएगा। दोनों नेताओं का मुख्य एजेंडा 2028 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को फिर से सत्ता में लाना है।
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यह नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं तब शुरू हुईं जब सिद्धारमैया ने नवंबर में मुख्यमंत्री के रूप में ढाई साल का कार्यकाल पूरा कर लिया। दरअसल, 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद ही सीएम पद को लेकर दोनों नेताओं के बीच रस्साकसी शुरू हो गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि दिल्ली में आलाकमान ने ढाई-ढाई साल के लिए सीएम पद संभालने का समझौता कराया था, हालांकि दोनों नेताओं और पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इस ‘रोटेशन फॉर्मूले’ को कभी स्वीकार नहीं किया।