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‘जिसे बेल नहीं देनी, उसे जस्टिस बेला के पास भेज दो?’ आरोपों पर पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने तोड़ी चुप्पी

EX CJI चंद्रचूड़ ने उन पर लगे तमाम आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में 21000 लोगों को जमानत दी गई। उन्होंने कहा SC में केसों का आवंटन एक कंप्यूटराइज्ड रैंडम प्रक्रिया के तहत होता है।

  • By सौरभ शर्मा
Updated On: Sep 26, 2025 | 01:53 PM

पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ (फोटो- सोशल मीडिया)

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Ex CJI DY Chandrachud Speak on Allegations: देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने अपने ऊपर लगे उन गंभीर आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि वह जमानत न देने वाले मामले जानबूझकर जस्टिस बेला त्रिवेदी की बेंच को सौंपते थे। इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में बोलते हुए उन्होंने इन दावों को पूरी तरह से निराधार और तथ्यों के खिलाफ बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में केसों का आवंटन एक कंप्यूटराइज्ड रैंडम प्रक्रिया के तहत होता है, जिसमें मुख्य न्यायाधीश की कोई व्यक्तिगत भूमिका नहीं होती।

यह धारणा बनाई जा रही थी कि जस्टिस बेला त्रिवेदी जमानत देने के मामले में काफी सख्त रुख रखती हैं, और जिन याचिकाओं को खारिज करना होता था, उन्हें पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ चतुराई से उनकी बेंच को आवंटित कर देते थे। इन चर्चाओं ने न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए थे, जिस पर अब पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने खुद तथ्यों और आंकड़ों के साथ विस्तार से जवाब दिया है। उन्होंने इस तरह के आरोपों को न्याय व्यवस्था की छवि खराब करने वाला बताया।

आंकड़ों से दिया आरोपों का जवाब

पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि आरोप लगाना बहुत आसान है, लेकिन तथ्य कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। उन्होंने बताया, “जब मैंने कहा था कि हम जमानत को प्राथमिकता देंगे, तो अपने दो साल के कार्यकाल में हमने 21,000 मामलों में जमानत दी।” उन्होंने जोर देकर कहा कि इस दौरान हर उस व्यक्ति को जमानत मिली जो इसका हकदार था। इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के मामले का जिक्र किया, जिन्हें प्रधानमंत्री पर टिप्पणी के मामले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसी दिन हस्तक्षेप करते हुए उन्हें अंतरिम जमानत दे दी थी।

यह भी पढ़ें: सपा के गढ़ में सेंध, RSS का तजुर्बा… क्या यह दलित नेता बनेगा UP बीजेपी का नया अध्यक्ष?

एक-दो शिकायतों से व्यवस्था पर सवाल नहीं

जस्टिस चंद्रचूड़ ने समझाया कि जमानत के मामले सुप्रीम कोर्ट की हर बेंच सुनती है, क्योंकि ये आपराधिक मामलों का एक बड़ा हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि किसी एक या दो शिकायतों के आधार पर पूरी व्यवस्था को गलत नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने इस बात को फिर से दोहराया कि “जमानत एक नियम होना चाहिए और जेल एक अपवाद”। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब कोई जज रिटायर होता है या किसी बेंच का पुनर्गठन होता है, तो मामलों का आवंटन एक स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही किया जाता है, जिसमें किसी भी तरह के व्यक्तिगत हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं होती।

Ex cji dy chandrachud reacts on allegations about justice bela trivedi bail cases

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Published On: Sep 26, 2025 | 01:53 PM

Topics:  

  • CJI D.Y. Chandrachud
  • Legal News
  • Supreme Court

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