‘पुरानी बोतल में नई शराब’, EC ने राहुल गांधी पर कसा तंज, आरोपों को बताया बेबुनियाद
Rahul Gandhi ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और 'वोट चोरी' का आरोप लगाया, जिस पर चुनाव आयोग ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और उनके आरोपों को निराधार बताते हुए निष्पक्षता पर सवाल उठाने को गलत ठहराया।
- Written By: अक्षय साहू
राहुल गांधी आरोपों पर चुनाव आयोग का जवाब (फोटो- सोशल मीडिया)
Rahul Gandhi vs Election Commission: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और चुनाव आयोग के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में राहुल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया कि वोटर लिस्ट में धांधली हो रही है और एक ही नाम अलग-अलग जगहों पर दर्ज हैं। अब इसमें चुनाव आयोग ने तिखी प्रतिक्रिया देते हुए उनके आरोपों तो बेबुनियाद करार दिया है।
राहुल गांधी ने 7 अगस्त को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हुए दावा किया था कि वोटर लिस्ट में धांधली हो रही है और एक ही नाम अलग-अलग जगहों पर दर्ज हैं। उन्होंने इसे ‘वोट चोरी’ की साजिश बताया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। चुनाव आयोग ने राहुल के आरोपों पर जवाब दिया है।
चुनाव आयोग की तीखी प्रतिक्रिया
राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने सख्त प्रतिक्रिया दी। आयोग ने कहा कि राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में वही पुराना आरोप दोहराया है जो 2018 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने लगाया था। आयोग ने इसे “पुरानी बोतल में नई शराब” बताया और कहा कि यह आरोप अब पुराना और निराधार हो चुका है।
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आयोग ने साफ किया कि 2018 में कमलनाथ ने एक निजी वेबसाइट के दस्तावेजों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में दावा किया था कि मतदाता सूची में गड़बड़ियां हैं और 36 मतदाताओं की तस्वीरें दोहराई गई हैं। हालांकि, सच्चाई यह थी कि चुनाव आयोग ने ये गलती पहले ही ठीक कर दी थी और संशोधित सूची की प्रति कांग्रेस पार्टी को दे दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी कमलनाथ की याचिका को खारिज कर दिया था।
2025 में राहुल गांधी ने वही पुराने मुद्दे फिर से उठाए, जबकि आयोग के अनुसार, जिन नामों की बात की जा रही है। आयोग ने कहा कि बार-बार इन्हीं मुद्दों को उठाना ये दिखाता है कि राहुल गांधी सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का सम्मान नहीं कर रहे हैं।
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आयोग की चेतावनी और सलाह
चुनाव आयोग ने कहा कि कानून के अनुसार, यदि किसी को आपत्ति है, तो उसे तय प्रक्रिया के तहत उठाया जाना चाहिए। मीडिया में सनसनी फैलाने के बजाय, राहुल गांधी को कानूनी मार्ग अपनाना चाहिए। अगर उन्हें अपने आरोपों पर विश्वास है, तो घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करें, नहीं तो देश से माफी माँगें।
