मानसून 5 दिन पीछे, अब अल-नीनो बढ़ाएगा मुश्किलें? इन 12 राज्यों पर सबसे बड़ा खतरा, इमरजेंसी तैयारी शुरू!

El Nino Impact: देश में मानसून की धीमी रफ्तार के बीच अल-नीनो का खतरा बढ़ा है। कृषि मंत्रालय ने 12 राज्यों के 326 जिलों को हाई-रिस्क पर रख आकस्मिक योजनाएं तैयार की हैं।
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सांकेतिक तस्वीर (AI Image)
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El Nino Impact on Indian Agriculture: देश में मानसून की धीमी रफ्तार के बीच कृषि क्षेत्र के सामने एक नई चुनौती खड़ी होती दिखाई दे रही है। मौसम विशेषज्ञों की निगाहें अब अल-नीनो की संभावित सक्रियता पर टिकी हैं, जिसका असर देश के कई राज्यों में खेती-किसानी पर पड़ सकता है। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार और कृषि मंत्रालय ने एहतियाती तैयारियां तेज कर दी हैं।

कृषि सचिव अतीष चंद्रा ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में बताया कि सरकार भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की जून के अंत में आने वाली नई मौसम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। इस रिपोर्ट के बाद अल-नीनो की स्थिति और उसके संभावित प्रभाव को लेकर अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

इन 12 राज्यों पर सबसे ज्यादा असर की आशंका

कृषि मंत्रालय ने उन 12 राज्यों की पहचान की है जहां वर्षा आधारित खेती अधिक होती है और जहां अल-नीनो का प्रभाव सबसे गंभीर रूप में देखने को मिल सकता है। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु शामिल हैं।

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सांकेतिक तस्वीर (Image- IANS)

326 जिलों को हाई-रिस्क श्रेणी में रखा गया

कृषि सचिव के अनुसार, इन राज्यों के भीतर 326 जिलों को उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया है। इन जिलों के लिए विशेष जिला स्तरीय आकस्मिक कार्य योजनाओं को अपडेट किया जा रहा है ताकि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से फसलों को बचाया जा सके। इस दिशा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (CRIDA) और विभिन्न राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के सहयोग से व्यापक तैयारियां चल रही हैं। विशेष रूप से तिलहन, ऑयल पाम, दलहन और कपास जैसी वर्षा पर निर्भर फसलों से जुड़े मिशनों की समीक्षा की जा रही है।

IMD की नई रिपोर्ट पर टिकी नजरें

अतीष चंद्रा ने कहा कि अल-नीनो कब और किस तीव्रता के साथ प्रभाव दिखाएगा, इसे लेकर अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग इस महीने के अंत तक नया विस्तृत पूर्वानुमान जारी करेगा। उस समय तक खरीफ फसलों की बुवाई अपने चरम पर होगी, जिससे यह आकलन करना आसान होगा कि मौसम का कृषि पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल उपलब्ध संकेतों के अनुसार अल-नीनो के नवंबर के आसपास सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन IMD अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले और अधिक सटीक आंकड़ों का विश्लेषण कर रहा है।

मानसून सामान्य से पीछे

मौसम विभाग ने जून से सितंबर के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून को दीर्घकालिक औसत का लगभग 90 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो सामान्य से कम वर्षा का संकेत माना जा रहा है। वर्तमान में मानसून अपनी निर्धारित गति से लगभग चार से पांच दिन पीछे चल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ मानसून की प्रगति में बाधा बना हुआ है।

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मानसून आगमन अपडेट (सौ. सोशल मीडिया )

वहीं पश्चिम बंगाल के ऊपर विकसित हो रहे कम दबाव के क्षेत्र के कारण मानसून पूर्वी हिस्सों में आगे बढ़ रहा है, जबकि महाराष्ट्र की ओर बढ़ने वाली इसकी दक्षिणी शाखा अपेक्षाकृत धीमी है। हालांकि तमिलनाडु को छोड़कर, जहां मुख्य वर्षा उत्तर-पूर्वी मानसून के दौरान होती है, अन्य अधिकांश राज्यों में मानसून के पहुंचने के बाद अब तक संतोषजनक बारिश दर्ज की गई है।

IOD की स्थिति भी चिंता का विषय

अल-नीनो के प्रभाव को कम या ज्यादा करने में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मई में सकारात्मक स्थिति में रहने वाला IOD जून में न्यूट्रल हो गया है, जिस पर कृषि मंत्रालय लगातार नजर बनाए हुए है। आमतौर पर पॉजिटिव IOD अल-नीनो के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर देता है, जबकि न्यूट्रल या नकारात्मक स्थिति में मानसून पर इसका असर अधिक दिखाई देता है। हालांकि मौसम वैज्ञानिक अभी भी उम्मीद कर रहे हैं कि समुद्री परिस्थितियों में कुछ बदलाव अल-नीनो के असर को कमजोर कर सकते हैं।

सरकार ने तैयार किया सुरक्षा कवच

कृषि सचिव ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि फिलहाल घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014-15 को छोड़ दें तो अल-नीनो का भारत की कृषि पर बहुत गंभीर प्रभाव देखने को नहीं मिला है। उस वर्ष भी कृषि उत्पादन अपेक्षाकृत बेहतर बना रहा था।

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सांकेतिक तस्वीर (सोर्स- IANS)

उन्होंने बताया कि देश के पास अब जलवायु-अनुकूल बीजों की उन्नत किस्में उपलब्ध हैं। इसके अलावा प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण की स्थिति पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर है। चिंता केवल उन क्षेत्रों को लेकर है जहां सिंचाई की सुविधाएं सीमित हैं, जबकि सिंचित क्षेत्र अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जा रहे हैं।

भूजल संरक्षण और जल संचयन को मजबूत करने के लिए सरकार ने अमृत सरोवर योजना के तहत 75 हजार तालाबों का पुनरुद्धार किया है। इसके अलावा एक लाख से अधिक भूजल पुनर्भरण संरचनाओं को भी पुनर्जीवित किया गया है।

खाद की उपलब्धता पर्याप्त

कृषि मंत्रालय के मुताबिक देश में उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त है और किसी प्रकार की कमी की आशंका नहीं है। बड़े किसानों ने पहले ही खाद का स्टॉक जमा कर लिया है, जबकि छोटे किसान आवश्यकता के अनुसार खरीदारी कर रहे हैं। मंत्रालय का दावा है कि इस समय खाद की उपलब्धता पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर स्थिति में है। ऐसे में सरकार का मानना है कि यदि मौसम में बड़ी प्रतिकूलता नहीं आती है तो कृषि क्षेत्र संभावित चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है।

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