ED की बड़ी कार्रवाई: टेरर फंडिंग और अवैध घुसपैठ नेटवर्क के खिलाफ बंगाल-यूपी समेत कई राज्यों में छापेमारी
ED Raid Terror Funding Case: ईडी ने कथित टेरर फंडिंग और अवैध घुसपैठ नेटवर्क से जुड़े मामले में पांच राज्यों के 16 ठिकानों पर छापेमारी कर 40 लाख रुपये नकद, सोना और कई अहम दस्तावेज जब्त किए हैं।
- Written By: करुणा नंद शाहवाल
ईडी रेड टेरर फंडिंग केस में 40 लाख रुपये बरामद (सोर्स- एआई नीर्मित)
ED Raid Illegal Infiltration Rohingya Network: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित टेरर फंडिंग और अवैध घुसपैठ नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा समेत कई राज्यों में 16 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। ईडी की यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ते (यूपी एटीएस) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई।
जांच एजेंसी के अनुसार, गिरोह पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की भारत में अवैध घुसपैठ कराने, उनके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट जैसे फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार कराने तथा देश के विभिन्न हिस्सों में उन्हें बसाने का आरोप है। जांच में कुछ ट्रस्टों और संस्थाओं की भूमिका भी सामने आई है, जिन पर विदेशी चंदे के जरिए अवैध गतिविधियों को वित्तीय सहायता देने का संदेह है। ईडी के अनुसार, छापेमारी के दौरान लगभग 40 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी, करीब 180 ग्राम सोना, डिजिटल उपकरण, बैंक रिकॉर्ड और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं। एजेंसी ने संबंधित व्यक्तियों के बयान भी दर्ज किए हैं और मामले की आगे जांच जारी है।
यूपी ATS की एफआईआर से शुरू हुई जांच
पीएमएलए जांच की शुरुआत एफआईआर से हुई, जिसे उत्तर प्रदेश आतंकवाद विरोधी दस्ते (यूपी एटीएस) ने आईपीसी, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत एक संगठित गिरोह के खिलाफ दर्ज किया था।
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यह गिरोह कथित तौर पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की भारत में अवैध घुसपैठ में सहायता करने, आधार कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट जैसे जाली भारतीय पहचान पत्र बनवाने और बाद में उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में पुनर्वासित करने में शामिल था।
अवैध घुसपैठ नेटवर्क पर शिकंजा
बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जांच में एक गहरे स्तर के नेटवर्क का खुलासा हुआ, जो जाली दस्तावेज तैयार करने, मानव तस्करी, घुसपैठियों के अवैध पुनर्वास और धोखाधड़ी के माध्यम से बैंक खाते संचालित करने में संलग्न था। जांच में कुछ धर्मार्थ ट्रस्टों और संस्थाओं की भूमिका का भी खुलासा हुआ, जिन पर विदेशी चंदा प्राप्त करने और अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप है।
आगे की जांच में एक जटिल वित्तीय नेटवर्क का पता चला, जिसमें विभिन्न ट्रस्ट और संस्थाएं शामिल थीं। इन संस्थाओं ने कथित तौर पर एफसीआरए चैनलों के माध्यम से पर्याप्त विदेशी धन प्राप्त किया और उसे कई स्तरों पर लेनदेन, फर्जी बैंक खातों और नकद निकासी के माध्यम से अवैध घुसपैठ और निपटान गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल किया।
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40 लाख नकद और सोना बरामद
जांच में कई बैंक खातों के व्यापक उपयोग और लाभार्थियों को छोटी-छोटी किश्तों में धन हस्तांतरण का भी संकेत मिला, ताकि उन्हें भारत में बसने में मदद मिल सके। तलाशी अभियान के दौरान, लगभग 40 लाख रुपए की बेहिसाब नकदी और लगभग 180 ग्राम सोना, साथ ही विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, बैंक रिकॉर्ड और जांच से संबंधित अन्य सबूत जब्त किए गए हैं। प्रमुख व्यक्तियों के बयान दर्ज किए गए हैं। आगे की जांच जारी है।
