दो सूटकेस लेकर पहुंचे थे राष्ट्रपति भवन, कहानी मौत को छूकर मुस्कुराने वाले ‘मिसाइल मैन’ की
देश के 11वें राष्ट्रपति रहे 'मिसाइल मैन' Abdul Kalam की जयंती है। इनकी सादगी की कहानियां पूरी दुनियां में सीखने के लिए उदाहरण के रूप में दी जाती है। ऐसी ही कुछ अनसुनी कहानियों से आपको रूबरू कराते है।
- Written By: सौरभ शर्मा
भारत के पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ एपीजे अब्दुल कलाम (फोटो- सोशल मीडिया)
Dr APJ Abdul Kalam Birth Anniversary Special: आज 15 अक्टूबर है, यानी भारत के ‘मिसाइल मैन’ और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जन्मदिन। यह दिन सिर्फ उनकी जयंती नहीं, बल्कि दुनिया भर में ‘विश्व छात्र दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। कलाम साहब को ‘जनता का राष्ट्रपति’ कहा जाता था, लेकिन उनकी जिंदगी सिर्फ इस पद तक सीमित नहीं थी। उनकी सादगी, ईमानदारी और ज्ञान की कहानियां आज भी हर भारतीय को प्रेरित करती हैं। आइए, आज उनकी जयंती पर उनकी जिंदगी के उन पन्नों को पलटते हैं जो हमें सिखाते हैं कि महानता सादगी में ही बसती है।
डॉ. कलाम हमेशा खुद को एक शिक्षक मानते थे। उनका मानना था कि छात्र ही देश का भविष्य हैं और शिक्षा वो ताकत है जो पूरी दुनिया को बदल सकती है। उनकी यही सोच थी कि साल 2010 में संयुक्त राष्ट्र ने उनकी 79वीं जयंती को ‘विश्व छात्र दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की। कलाम साहब का एक प्रसिद्ध कथन है, “सपने वो नहीं जो आप सोते समय देखते हैं, बल्कि सपने वो हैं जो आपको सोने नहीं देते।” यही भावना थी जिसने उन्हें छात्रों के बीच एक आदर्श बना दिया।
सिर्फ दो सूटकेस वाले राष्ट्रपति
डॉ. कलाम की सादगी का सबसे बड़ा उदाहरण तब देखने को मिला जब वह 2002 में भारत के 11वें राष्ट्रपति बने। जब वे राष्ट्रपति भवन पहुंचे, तो उनके साथ सिर्फ दो सूटकेस थे, जिनमें कुछ कपड़े और उनकी पसंदीदा किताबें थीं। पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद जब उन्होंने 2007 में राष्ट्रपति भवन छोड़ा, तब भी उनके पास वही दो सूटकेस थे। उन्होंने अपने पूरे जीवन में कोई निजी संपत्ति नहीं बनाई और अपनी कमाई हमेशा शिक्षा और समाज के कामों में लगा दी। यही वजह है कि वे लोगों के दिलों में बसते थे।
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जब मौत को छूकर मुस्कुरा दिए कलाम
उनकी जिंदगी में एक ऐसा भी पल आया जब वे मौत के मुंह से बाल-बाल बचे। सितंबर 2001 में, राष्ट्रपति बनने से कुछ महीने पहले, वे झारखंड के बोकारो में एक स्कूल कार्यक्रम के लिए हेलीकॉप्टर से जा रहे थे। अचानक हेलीकॉप्टर में तकनीकी खराबी आ गई और वह जोरदार झटके के साथ जमीन पर आ गिरा। इस भयानक हादसे के बाद भी कलाम साहब के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी, बल्कि वे मुस्कुरा रहे थे। उन्होंने अपनी किताब ‘तेजस्वी मन’ में लिखा है कि इस घटना के बाद वे विचलित हुए बिना बच्चों को संबोधित करने चले गए।
