शहाबुद्दीन की विरासत संभालेंगे ओसामा, RJD ने रघुनाथपुर से दिया टिकट, सियासी गलियारों में हलचल तेज

Bihar Assembly Elections के उम्मीदवारों की चर्चा इस समय पूरे प्रदेश की राजनीति में है। वहीं RJD ने रघुनाथपुर सीट से शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब को टिकट दिया है। ये शहाबुद्दीन के इकलौते बेटे हैं।
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शहाबुद्दीन की विरासत संभालेंगे ओसामा (फोटो- सोशल मीडिया)
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Osama RJD Candidate From Raghunathpur Constituency: बिहार की राजनीति में एक बड़ा फैसला सामने आया है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। दिवंगत बाहुबली नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब अब अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाएंगे। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने उन्हें 2025 के विधानसभा चुनाव के लिए सीवान की रघुनाथपुर सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया है। पार्टी की तरफ से उन्हें सिंबल भी दे दिया गया है, जिसके बाद यह साफ हो गया है कि ओसामा अपनी सियासी पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं।

यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रघुनाथपुर के मौजूदा RJD विधायक हरिशंकर यादव ने ओसामा के लिए अपनी सीट छोड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने ओसामा को अपना पूरा समर्थन दिया है, जो शहाबुद्दीन परिवार के प्रति पार्टी के सम्मान और उनकी सियासी पकड़ को दर्शाता है। अक्टूबर 2024 में ही ओसामा और उनकी मां हिना शहाब ने लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव की मौजूदगी में RJD की सदस्यता ली थी, जिसके बाद से ही उनके चुनाव लड़ने के कयास लगाए जा रहे थे।

लंदन से LLB, फिर सियासत में एंट्री

12 जून 1995 को सीवान में जन्मे ओसामा शहाब ने अपनी शुरुआती पढ़ाई सीवान और दिल्ली से पूरी की। जीडी गोयनका स्कूल से 12वीं करने के बाद वह कानून की पढ़ाई के लिए लंदन चले गए, जहां से उन्होंने एलएलबी की डिग्री हासिल की। 2021 में उनकी शादी डॉक्टर आयशा से हुई, जिन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस किया है। पढ़ाई पूरी करने के बाद बिहार लौटे ओसामा अब पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय हो गए हैं और पिता की विरासत को आगे ले जाने के लिए तैयार हैं।

विवादों से भी रहा है नाता

हालांकि, ओसामा शहाब का नाम कुछ आपराधिक मामलों में भी सामने आया है। 2023 में उन्हें एक मामले में राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद सीवान कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया था, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई। इसके अलावा मोतिहारी में भी संपत्ति विवाद से जुड़े एक मामले में उन पर गोलीबारी और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगे थे, जिसमें कोर्ट से उन्हें राहत मिल चुकी है। अब देखना यह होगा कि चुनावी मैदान में जनता उन्हें कितना स्वीकार करती है।

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