महिला आरक्षण विधेयक: डिंपल यादव ने बीजेपी पर लगाया गंभीर आरोप, कहा-परिसीमन बीजेपी के सशक्तिकरण का हथियार
Dimple Yadav Lok Sabha Speech: सांसद डिंपल यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए बताया, इस विधेयक के जरिए वह खुद को मजबूत करना चाहती है। अभी तक जनगणना क्यों नहीं हुई? अब अचानक जल्दबाजी क्यों दिख रही है?
- Written By: अमन मौर्या
डिंपल यादव (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Women Reservation Bill: विशेष संसद सत्र के दौरान लोकसभा में परिसीमन विधेयक पर पक्ष-विपक्ष पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष की ओर सरकार पर परिसीमन विधेयक पर भारी विरोध देखने को मिला।
चर्चा के दौरान सपा सांसद डिंपल यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण के जरिए बीजेपी परिसीमन विधेयक पास कराना चाहती है। इस विधेयक के जरिए वह खुद को मजबूत करना चाहती है। सांसद डिंपल यादव ने सरकार पर यह सवाल भी उठाया कि अभी तक जनगणना क्यों नहीं हुई? और अब अचानक जल्दबाजी क्यों दिख रही है?
अपने सशक्तिकरण में कर रहे इस्तेमाल
एएनआई से बात करते हुए सपा सांसद डिंपल यादव ने महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि, संविधान में जो संशोधन चाह रहे हैं उसके पक्ष में हम नहीं है, क्योंकि कही न कही परिसीमन का सहारा लेकर ये लोग पूरी प्रक्रिया है उसको अपने सशक्तिकरण के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं।
सपा सांसद ने महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 का समर्थन किया। उन्होनें कहा कि, जो पहला आरक्षण बिल 2023 में पास हुआ था उसके अनुरूप सपा चाहती है ये लागू हो।
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आखिर क्यों इतना विरोध हो रहा है?
अब सवाल ये उठता है कि आखिरकार विपक्ष द्वारा महिला आरक्षण बिल, 2023 (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) का समर्थन की बात कर रहा है। इसके बाद भी विशेष संसद सत्र में सरकार को बिल पास कराने पर भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, विवाद का मुख्य कारण महिला आरक्षण बिल के साथ जनगणना और परिसीमन से जोड़ने के कारण हो रहा है।
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विरोध के मुख्य कारण-
- महिला आरक्षण को भविष्य की जनगणना और सीटों के परिसीमन से जोड़ना
- दक्षिण बनाम उत्तर भारत में सीट शेयरिंग का विवाद
- ओबीसी आरक्षण की मांग पर विवाद
- लागू करने के समय और प्रक्रिया पर विवाद
विपक्ष का कहना है, कि इस बिल को सरकार अपने पक्ष में इस्तेमाल करना चाहती है। साथ ही दक्षिण भारतीय राज्यों का आरोप है कि परिसीमन से उनकी संसदीय सीटें कम हो जाएंगी, दक्षिणी राज्यों ने अपनी जनसंख्या नियंत्रित कर ली है। इससे उनको संसद में कम प्रतिनिधित्व मिलेगा, जबकि उत्तर भारतीय राज्यों जैसे- उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे राज्यों को उनके ज्यादा जनसंख्या की वजह से लाभ मिलेगा।
