30 साल पुराना किस्सा…दिग्विजय सिंह ने PM मोदी की जिस तस्वीर से हिला दी कांग्रेस, जानिए उसकी कहानी
Congress Crisis: दिग्विजय सिंह ने एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की है, इसमें उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी के साथ युवा नरेंद्र मोदी की 30 साल पुरानी तस्वीर साझा की और आरएसएस की तारीफ की।
- Written By: अर्पित शुक्ला
PM मोदी की पुरानी तस्वीर (Image- Social Media)
PM Modi and Lalkrishna Advani Image Story: कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने शुक्रवार को नई दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक से पहले एक सोशल मीडिया पोस्ट कर हलचल मचा दी। इस पोस्ट में उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी और पीएम मोदी की तस्वीर साझा की। उन्होंने आरएसएस और भाजपा के मजबूत संगठन की तारीफ की। साथ ही यह बताने की कोशिश की कि कैसे जमीनी स्तर का नेता मजबूत संगठन के कारण देश का प्रधानमंत्री भी बन सकता है। दिग्विजय सिंह की इस तस्वीर ने कांग्रेस में हलचल पैदा कर दी। सीडब्ल्यूसी की मीटिंग से ठीक पहले दिग्गी राजा की पोस्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए। ऐसा संदेश गया कि उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भी कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की है।
1995 गांधी नगर की है वह तस्वीर
लेकिन क्या आपको पता है कि दिग्विजय सिंह ने जो तस्वीर शेयर की, वह कब और कहां की है? असल में यह तस्वीर 14 मार्च 1995 की गांधी नगर, गुजरात की है। यह भाजपा के लिए सुनहरा दिन था, जब भाजपा ने विधानसभा चुनावों में 121 सीटें जीतकर चिमनभाई पटेल की कांग्रेस सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। तस्वीर केशुभाई पटेल के पहली बार मुख्यमंत्री बनने के शपथग्रहण समारोह की है। शपथग्रहण समारोह के लिए बनाए गए विशाल पंडाल में भारी भीड़ उमड़ी थी। वहां मंच पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे थे। उनके साथ कमला आडवाणी और ठीक पीछे प्रमोद महाजन बैठे थे। साथ ही आनंदी बेन पटेल भी दिखाई दे रही थीं।
आडवाणी के साथ युवा नरेंद्र मोदी
नीचे फर्श पर आडवाणी के पास भाजपा के एक युवा कार्यकर्ता नरेंद्र मोदी बैठे थे। नरेंद्र मोदी उस समय गुजरात भाजपा के संगठन महामंत्री के तौर पर कार्यरत थे और गुजरात भाजपा संगठन की रीढ़ माने जाते थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा से निकलकर 1987 से सक्रिय रहे मोदी ने चुनावी रणनीति को नई धार दी। एलके आडवाणी की रथ यात्रा ने गुजरात में हिंदुत्व की लहर पैदा की। उस समय गुजरात में 100 से ज्यादा सीटों का श्रेय भी उन्हें मिला। पार्टी का कहना है कि वरिष्ठों के सम्मान में फर्श पर बैठना भाजपा-आरएसएस की अनुशासन संस्कृति का प्रतीक है।
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छह बार के विधायक और आरएसएस प्रचारक रहे केशुभाई पटेल उस समय शपथ ले रहे थे। गुजरात में भगवा पार्टी की सरकार बनने के बीच भीड़ में जोशीले नारे गूंज रहे थे। हालांकि, 1996 में शंकरसिंह वाघेला के विद्रोह से केशुभाई की कुर्सी चली गई और वे 1998 में लौटे। भुज में विनाशकारी भूकंप के बाद 2001 में नरेंद्र मोदी ही मुख्यमंत्री बने।
