राष्ट्रपति के स्वागत में CM का होना जरूरी...क्या कहता है 'ब्लू बुक' का नियम? विवाद के बीच समझें पूरा प्रोटोकॉल

Mamata Banerjee vs President Controversy: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान उनका स्वागत नहीं किया।
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President visit Protocol Explainer: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान उनका स्वागत नहीं किया। इस पर सफाई देते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि राष्ट्रपति BJP के एजेंडे में फंस गई हैं। वहीं, पीएम मोदी ने भी इस मुद्दे को लेकर ममता बनर्जी और TMC पर जोरदार हमला बोला।

दूसरी तरफ इस विवाद के बीच लोगों के जेहन में यह सवाल कौंधने लगा है कि जब राष्ट्रपति किसी राज्य के दौरे पर जाते हैं तो क्या प्रोटोकॉल होता है? क्या राष्ट्रपति को रिसीव करने के लिए मुख्यमंत्री या किसी मंत्री का होना सच में जरूरी है? आपके भी मन में यही सवाल होगा! इसलिए आइए इन सवालों के जवाब जान लेते हैं...

स्वागत के लिए CM का होना जरूरी है?

दरअसल, राष्ट्रपति के आने पर मुख्यमंत्री का खुद स्वागत करना जरूरी नहीं है। हालांकि प्रोटोकॉल में यह लिखा होता है अगर मुख्यमंत्री मौजूद नहीं हैं, तो उन्हें अपनी गैरमौजूदगी में राष्ट्रपति के स्वागत और अभिवादन की जिम्मेदारी किसी मंत्री को सौंप देनी चाहिए।

पश्चिम बंगाल में यह विवाद क्यों हुआ?

पहले भी ऐसे मामले हुए हैं जब मुख्यमंत्री खुद राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री का स्वागत नहीं कर पाए। लेकिन ऐसी स्थितियों में भी किसी मंत्री को यह जिम्मेदारी दी जाती है। पश्चिम बंगाल मामले में विवाद इसलिए हुआ क्योंकि ममता बनर्जी खुद इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुईं और कोई मंत्री भी मौजूद नहीं था।

'ब्लू बुक' दर्ज होता है पूरा प्रोटोकॉल

राष्ट्रपति के कार्यक्रम के दौरान गाइडलाइंस और प्रोटोकॉल में क्या होना चाहिए यह एक 'ब्लू बुक' में दर्ज होता है। इसमें डिटेल में बताया गया है कि जब प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट या प्राइम मिनिस्टर किसी राज्य या जिले के दौरे पर आएं तो स्वागत और प्रोग्राम का इंतजाम कैसे किया जाना चाहिए।

आखिर कौन अपडेट करता है 'ब्लू बुक'?

इस 'ब्लू बुक' को समय-समय पर अपडेट किया जाता है और यह यूनियन होम मिनिस्ट्री की जिम्मेदारी है। इस बुक की कॉपी हर जिले में मौजूद होती हैं और आमतौर पर डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की कस्टडी में रखी जाती हैं ताकि जरूरत पड़ने पर नियमों को देखा जा सके।

CM-राज्यपाल करते हैं राष्ट्रपति का स्वागत

वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, जब प्रेसिडेंट, प्राइम मिनिस्टर या वाइस प्रेसिडेंट किसी राज्य के दौरे पर आते हैं, तो उनका स्वागत आमतौर पर राज्यपाल या मुख्यमंत्री के द्वारा किया जाता है। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में मुख्यमंत्री यह जिम्मेदारी किसी अन्य मंत्री को सौंप सकते हैं।

PM का स्वागत करने पहुंचती थीं ममता

पश्चिम बंगाल में ऐसा बहुत कम होता था कि किसी बड़े संवैधानिक अधिकारी का स्वागत राज्य सरकार के किसी प्रतिनिधि द्वारा न किया जाए। मई 2021 में जब BJP और ममता बनर्जी के बीच राजनीतिक तनाव अपने पीक पर था, तब भी ममता बनर्जी ने एयरपोर्ट पहुंचकर पीएम मोदी का स्वागत किया था।

...जब स्वागत को नहीं पहुंचे CM योगी

यूपी में प्रोटोकॉल का दूसरा पक्ष तब देखने को मिला जब पिछले साल सितंबर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल उनका स्वागत नहीं कर पाए थे। उस समय मुख्यमंत्री योगी ने अपने मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी को राष्ट्रपति के स्वागत की जिम्मेदारी सौंपी थी।

अखिलेश करते थे PM-राष्ट्रपति का स्वागत

वहीं, 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से लेकर 2017 तक जब भी वे उत्तर प्रदेश आए, तब के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हमेशा उनकी गैरमौजूदगी में उनके स्वागत के लिए किसी मंत्री को तैनात करते थे। इसी तरह राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के दौरे के दौरान भी राज्य सरकार के किसी मंत्री को उनके स्वागत की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

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