Karnataka Caste Census: इस्तीफे से पहले सिद्धारमैया का बड़ा सियासी दांव, जातिगत जनगणना रिपोर्ट को दी मंजूरी
Karnataka Caste Census Report: संभावित इस्तीफे से ठीक पहले CM सिद्धारमैया ने बड़ा सियासी दांव खेला है। कर्नाटक की बहुप्रतीक्षित जाति जनगणना रिपोर्ट को मंजूरी दे दी है। इससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
- Written By: अमन मौर्या
कर्नाटक सीएम सिद्धारमैया ने जाति जनगणना को आधिकारिक रूप से स्वीकार की (फोटो सोर्स- @siddaramaiah)
Siddaramaiah AHINDA Politics Masterstroke: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस्तीफे को लेकर चल रही चर्चा के बीच एक बड़ा सियासी दांव खेला है। संभावित इस्तीफे से ठीक एक दिन पहले सीएम सिद्धारमैया ने राज्य पिछड़े वर्ग आयोग की ‘सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सर्वेक्षण’ रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। आयोग की यह रिपोर्ट जातिगत जनगणना को लेकर है।
कर्नाटक से दिल्ली तक मुख्यमंत्री के इस्तीफे की अटकलों के बीच सिद्धारमैया का यह बड़ा राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। सिद्धारमैया का यह कदम ‘अहिंदा’ वोटबैंक को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
‘अहिंदा’ राजनीति मुख्य एजेंडा
बता दें, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की राजनीति मुख्य रूप से सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व पर केंद्रित रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रिपोर्ट को स्वीकार कर उन्होंने यह संदेश दिया है कि वे राजनीतिक जीवन के अंतिम पड़ाव में भी सामाजिक न्याय के मुद्दे पर कायम हैं। सिद्धारमैया की ‘अहिंदा’ राजनीति का केंद्र राज्य के अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों और दलितों का एक मजबूत राजनीतिक वोटबैंक तैयार करना है।
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सोशल मीडिया पर साझा किया रिपोर्ट
अपने एक्स हैंडल पर जानकरी साझा करते हुए सीएम सिद्धारमैया ने लिखा, जब मैं पहली बार मुख्यमंत्री बना था, तो राज्य के हर समुदाय के लोगों की सामाजिक और शैक्षणिक हालत के बारे में पूरी जानकारी इकट्ठा करने के मकसद से मैंने कर्नाटक स्टेट कमीशन फॉर बैकवर्ड क्लासेस को एक ‘सोशल एंड एजुकेशनल सर्वे’ करने का आदेश दिया था।
ಮೊದಲ ಬಾರಿಗೆ ನಾನು ಮುಖ್ಯಮಂತ್ರಿಯಾಗಿದ್ದ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ರಾಜ್ಯದ ಪ್ರತಿಯೊಂದು ಸಮುದಾಯದ ಜನರ ಸಾಮಾಜಿಕ, ಶೈಕ್ಷಣಿಕ ಪರಿಸ್ಥಿತಿಯ ಪೂರ್ಣ ಮಾಹಿತಿಯನ್ನು ಸಂಗ್ರಹಿಸುವ ಉದ್ದೇಶದಿಂದ ರಾಜ್ಯ ಹಿಂದುಳಿದ ವರ್ಗಗಳ ಆಯೋಗಕ್ಕೆ “ಸಾಮಾಜಿಕ ಮತ್ತು ಶೈಕ್ಷಣಿಕ ಸಮೀಕ್ಷೆ” ನಡೆಸುವಂತೆ ಆದೇಶಿಸಿದ್ದೆ. ನಂತರ ಬಂದ ಸರ್ಕಾರಗಳು ವರದಿ ಸ್ವೀಕರಿಸಲು ಹಿಂದೇಟು… pic.twitter.com/5ywxfewO4h — Siddaramaiah (@siddaramaiah) May 27, 2026
पूर्व की सरकार पर लगाया आरोप
सिद्धारमैया ने पूर्व की सरकार पर आरोप लगाते हुए लिखा कि बाद की सरकारों ने रिपोर्ट मानने से पीछे हट गईं, जिससे सर्वे, जो अब लगभग एक दशक पुराना है, लागू नहीं हुआ। दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद मैंने इस जानकारी को और भी साइंटिफिक तरीके से इकट्ठा करने के लिए नई जनगणना का आदेश दिया।
आज मैंने सोशल एंड एजुकेशनल सर्वे की रिपोर्ट को बहुत खुशी के साथ स्वीकार कर लिया है। मुझे उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह रिपोर्ट सोशल जस्टिस को लागू करने के लिए एक गाइड का काम करेगी।
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क्या है मामला?
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष मधुसूदन नायक ने बुधवार को सीएम सिद्धारमैया को यह सर्वे रिपोर्ट सौंपी। इस सर्वे रिपोर्ट को आमतौर पर कर्नाटक जाति जनगणना कहा जाता है। प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। राज्य के मौजूदा डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को अगला सीएम बनाने की अटकलें चल रही हैं।
ऐसे में सीएम सिद्धारमैया द्वारा इस रिपोर्ट को स्वीकार करना एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। जानकारों की मानें तो मुख्यमंत्री पद छोड़ने से पहले सिद्धारमैया राज्य में खुद को पिछड़े वर्ग के सबसे बड़े नेता के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।
