Explainer: दिग्गज नेता के बेटे, मोदी कैबिनेट में 2014 से मंत्री; BJP में कितने ताकतवर हैं धर्मेंद्र प्रधान?
Education Minister Dharmendra Pradhan: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों प्रदर्शन जारी है। बावजूद इसके पीएम मोदी की नेतृत्व वाली सरकार ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया है।
- Written By: मनोज आर्या
बीजेपी में धर्मेंद्र प्रधान कितने ताकतवर? (AI जेनरेटेड इमेज)
How Powerful is Dharmendra Pradhan in BJP: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पूरे देश में धरना प्रदर्शन जारी है। पहले कॉकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर सोमवार, 20 जुलाई को भारी संख्या में युवा छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक मार्च किए। इसके बाद मंगलवार, 21 जुलाई को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कांग्रेस नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकारी आवास के बाहर धरना प्रदर्शन किया। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली सरकार पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, सरकार की ओर से इस्तीफे के सवाल पर अभी तक कोई खास प्रतिक्रिया नहीं आई है।
दिल्ली में 20 जुलाई को जारी प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस दौरान सरकार की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और प्रवक्ता आशुतोष राका से बातचीत की। जिसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने अपनी प्रमुख मांगे- धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और नीट पेपरलीक से आहत होकर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये के मुआवजा देने की मांग की। लेकिन दो दिन बीत जाने के बाद भी धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ कोई ठोस एक्शन नहीं हुआ।
क्या धर्मेंद्र प्रधान से डर रही सरकार?
नीट पेपर लीक होने के दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री के पद पर बने हुए हैं। जिसके बाद अब सरकार पर भी सवाल उठने लगे हैं कि आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें सस्पेंड क्यों नहीं कर रहे हैं? वहीं, विपक्ष भी निशाना साधते हुए सत्ताधारी बीजेपी से सवाल पूछ रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही…सरकार धर्मेंद्र प्रधान से क्यों डर रही है। आखिर पार्टी में वो कितने ताकतवर हैं। इन सभी सवालों को जवाब जानने के लिए सबसे पहले हमें धर्मेंद्र प्रधान के बैकग्राउंड के बारे में जानना होगा।
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धर्मेंद्र प्रधान का सियासी बैकग्राउंड
केंद्रीय या स्थानीय राजनीति में जब भी भाजपा के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकारों और संकटमोचकों की बात होती है, तो धर्मेंद्र प्रधान का नाम टॉप-10 नेताओं में लिया जाता है। साल 2014 से वे लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैबिनेट के अहम हिस्सा रहे। 2014 से 2026 के बीच उन्होंने केंद्रीय मंत्री के तौर पर कई महत्वपूर्ण विभागों का नेतृत्व किया। धर्मेंद्र प्रधान न केवल नीतिगत स्तर पर, बल्कि सांगठनिक मोर्चे पर भी पार्टी के सबसे मजबूत चेहरों में से एक हैं।
पिता देबेंद्र प्रधान BJP के दिग्गज नेता
धर्मेंद्र प्रधान के पिता देबेंद्र प्रधान भाजपा के दिग्गज नेता थे। वे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके थे। इसके अलावा उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में भी का किया था। राजनीतिक माहौल में पले-बढ़े धर्मेंद्र प्रधान ने छात्र राजनीति से अपने करियर की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से की। उन्होंने 1983 में ABVP कार्यकर्ता के रूप में काम शुरू किया और बाद में उत्कल विश्वविद्यालय से एम.ए. करने के दौरान छात्र संघ अध्यक्ष बने।
साल 2000 में पहली बार ओडिशा के पल्लहारा विधानसभा सीट से चुनाव से जीतकर धर्मेंद्र प्रधान पहली बार विधायक बने। इसके बाद साल 2004 में वे देवगढ़ लोकसभा सीट से सांसद बनकर दिल्ली में पहुंचे। इसके साथ ही 2004 से 2006 तक वे भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी काम किया। इसके साथ ही वे बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव और अखिल भारतीय महासचिव सहित पार्टी के विभिन्न पदों पर रहे।
2014 से मोदी कैबिनेट का प्रमुख चेहरा
साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी तब से लेकर आज तक धर्मेंद्र प्रधान लगातार केंद्रीय मंत्रिमंडल में बने हुए हैं। साल 2014–2021 तक वे पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार के तौर पर काम किया। हालांकि, बाद में वे कैबिनेट मंत्री बने। मोदी सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ (गरीब महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन) को धरातल पर उतारने का श्रेय उन्हीं को जाता है। साल 2017-2024 के दौरान इस्पात एवं कौशल विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी उनके पास थी। उन्होंने देश में स्किल इंडिया मिशन को नई गति दी और भारतीय युवाओं के कौशल विकास की नीतियों को मजबूती दी।
वहीं, साल 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट में हुए विस्तार के बाद धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। तब से लेकर अब तक वह इस पद पर बने हुए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को राज्यों में लागू करने और शिक्षा क्षेत्र में सुधारों का नेतृत्व खुद धर्मेंद्र प्रधान कर रहे हैं।
BJP में कितने ताकतवर धर्मेंद्र प्रधान?
भाजपा के शक्ति संतुलन में धर्मेंद्र प्रधान का कद बेहद मजबूत माना जाता है। उनके प्रभाव और ताकत को 4 प्रमुख बिंदुओं से समझ सकते हैं।
1. शीर्ष नेतृत्व का अटूट भरोसा
धर्मेंद्र प्रधान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना जाता है। वे बिना किसी विवाद के चुपचाप काम करने और सौंपे गए दायित्वों को समय पर पूरा करने के लिए जाने जाते हैं।
2. चुनाव प्रबंधन और संगठन
धर्मेंद्र प्रधान को चुनाव मैनेजमेंट और संगठन के ‘मास्टर माइंड’ के तौर पर जाना जाता है। पार्टी जब भी किसी कठिन राज्य के चुनाव में उतरती है, तो चुनाव प्रभारी या संकटमोचक के रूप में प्रधान को ही भेजा जाता है। बिहार में भाजपा-जेडीयू गठबंधन के समन्वय और चुनाव प्रबंधन में उनकी अहम भूमिका रही। इसके अलावा यूपी में 2022 के चुनाव के दौरान भाजपा का चुनाव प्रभारी बनाकर भेजा गया, जहां पार्टी ने पूर्ण बहुमत से वापसी की।
3. ओडिशा में BJP के उदय के शिल्पकार
ओडिशा में नवीन पटनायक के दो दशक से अधिक लंबे साम्राज्य को ध्वस्त कर पहली बार भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में धर्मेंद्र प्रधान की रणनीति की सबसे बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने लंबे समय तक राज्य में पार्टी का झंडा उठाए रखा और 2024 के लोकसभा चुनाव में संबलपुर से खुद चुनाव जीतकर संसद पहुंचे।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री और बीजेपी के सीनियर नेता धर्मेंद्र प्रधान, (सोर्स- सोशल मीडिया)
4. प्रशासनिक एवं सांगठनिक संतुलन
वे दक्षिण से लेकर उत्तर भारत की राजनीति और क्षेत्रीय क्षत्रपों के साथ बेहतर तालमेल बिठाने की कला में माहिर हैं। हिंदी, अंग्रेजी, ओड़िया, बंगाली और मराठी जैसी भाषाओं पर पकड़ उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर और भी प्रभावी बनाती है।
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खतरे में धर्मेंद्र प्रधान का सियासी भविष्य!
धर्मेंद्र प्रधान भाजपा के उन गिने-चुने नेताओं में से हैं, जिन्होंने केवल विरासत के दम पर नहीं, बल्कि धरातल पर अपनी सांगठनिक क्षमता और प्रशासनिक दक्षता से खुद के लिए जगह बनाई है। पिछले 12 सालों से जिस तरह वे मोदी कैबिनेट के अहम हिस्सा रहे हैं, यह दर्शाता है कि वर्तमान और भविष्य की भाजपा में वे एक बेहद ताकतवर धुरी हैं। हालांकि, हालिया पेपर लीक की घटनओं ने उनकी छवि को कमजोर किया है। सरकार पूरी तरह से बैकफुट पर आ चुकी है। इस बीच धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक भविष्य भी सवालों के घेरे में हैं।
