चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा, 65 लाख मतदाताओं पर दिया बड़ा अपडेट
Election Commission ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर बताया कि बिहार के 65 लाख मतदाताओं के नाम और विवरण राज्य के सभी 38 जिला निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइटों पर डाल दिए गए हैं।
- Written By: सौरभ शर्मा
चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा
Bihar SIR Voter List Upload: बिहार में मतदाता सूची से हटाए गए 65 लाख से ज्यादा नामों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर बताया कि इन सभी मतदाताओं के नाम और विवरण राज्य के 38 जिला निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि नाम हटाने के पीछे मृत्यु, निवास स्थान परिवर्तन और डुप्लिकेट प्रविष्टियां जैसे कारण रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर आज फिर सुनवाई होगी।
चुनाव आयोग ने बताया कि मतदाता सूची की भौतिक प्रतियां बिहार के पंचायत भवनों, प्रखंड विकास कार्यालयों और पंचायत कार्यालयों में प्रदर्शित की गई हैं। इसके अलावा, ऑनलाइन उपलब्धता के बारे में प्रमुख अखबारों, रेडियो, टीवी और सोशल मीडिया के जरिए व्यापक प्रचार किया गया है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया है कि कोई भी पात्र मतदाता बिना पूर्व सूचना और सुनवाई के अवसर के बिना सूची से नहीं हटाया जाएगा। दावा दर्ज करने की अंतिम तिथि 1 सितंबर तय की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आयोग की कार्रवाई
14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि हटाए गए मतदाताओं की सूची कारण सहित ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाए। इसके अनुपालन में चुनाव आयोग ने हलफनामा दायर कर बताया कि बूथवार सूची वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है, जिसमें ईपीआईसी नंबर से नाम खोजे जा सकते हैं। आयोग ने यह भी कहा कि पीड़ित व्यक्ति आधार कार्ड की प्रति के साथ अपने दावे पेश कर सकते हैं। दावा प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन और प्रिंट, दोनों विकल्प उपलब्ध हैं।
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विशेष गहन संशोधन में सामने आए आंकड़े
बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत कुल 7.89 करोड़ मतदाताओं की जांच की गई। इसमें 7.24 करोड़ लोगों ने अपने नाम की पुष्टि की या फॉर्म जमा किए। आयोग ने बताया कि नाम हटाने के मुख्य कारण मृत्यु, सामान्य निवास स्थानांतरण और डुप्लिकेट प्रविष्टियां थीं। प्रारूप सूची 1 अगस्त को प्रकाशित की गई थी और आपत्तियां दर्ज करने का समय 1 अगस्त से 1 सितंबर तक तय किया गया है। आयोग का कहना है कि हर योग्य मतदाता का नाम अंतिम सूची में शामिल करने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
