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निकाय चुनाव पर SC की सशर्त हरी झंडी, नागपुर-चंद्रपुर मनपा चुनाव पर ग्रहण, 21 जनवरी को अगली सुनवाई

Supreme Court Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र निकाय चुनाव को हरी झंडी देते हुए स्पष्ट किया कि 50% आरक्षण सीमा पार नहीं होगी। नागपुर-चंद्रपुर मनपा के नतीजे 21 जनवरी की सुनवाई पर निर्भर रहेंगे।

  • By प्रिया जैस
Updated On: Nov 29, 2025 | 06:57 AM

सुप्रीम कोर्ट (डिजाइन फोटो)

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Maharashtra Local Body Elections: महाराष्ट्र में 2 दिसंबर को होने वाले 246 नगर पालिका व 42 नगर पंचायत के चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में इन चुनावों को हरी झंडी दे दी , लेकिन जिन नगर परिषदों और नगर पंचायतों में पहले से 50 % से अधिक आरक्षण अधिसूचित हो चुका है, वहां चुनाव तो तय कार्यक्रम के अनुसार होंगे, लेकिन उनके नतीजे रिट याचिकाओं के अंतिम फैसले पर निर्भर होंगें।

यह एक बड़ी शर्त सर्वोच्च न्यायालय ने थोप दी है। नए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस बागची की पीठ ने महाराष्ट्र में ओबीसी आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। पीठ ने मामले को तीन-न्यायाधीशों की बड़ी बेंच को भेजते हुए अगली सुनवाई के लिए 21 जनवरी की तारीख निश्चित की है।

सुप्रीम कोर्ट ने सख्त तेवर में आदेश दिए है कि जिन निकायों के चुनाव अभी नहीं घोषित हुए हैं, उनमें किसी भी स्थिति में आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत की मर्यादा को क्रॉस नहीं करना चाहिए। इसका अच्छी से ध्यान रखा जाए।

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50 % की मर्यादा का हो पालन

इस पर सरकार के वकील ने बताया कि सिर्फ दो महानगरपालिकाएं ऐसी हैं जहां आरक्षण 50% से ऊपर जाने की संभावना है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इनके चुनाव भी अधिसूचित किए जा सकते हैं, लेकिन नतीजे 21 जनवरी को रिट याचिकाओं पर होने वाले सुनवाई के फैसले पर निर्भर होगी।

अभी तक 29 नगर निगम, 32 जिला परिषद और 346 पंचायत समितियां ऐसी हैं, जहां अधिसूचना जारी नहीं हुई है। सीजेआई ने एक बार फिर दोहराया कि समाज को जाति की रेखाओं में नहीं बांटा जाना चाहिए।

जीतकर भी हार

सुप्रीम कोर्ट ने यह कह कर उम्मीदवारों की धुकधुकी बढ़ा दी है कि जिन 40 नगर परिषद और 17 नगर पंचायत में आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक है। वहां के चुनाव नतीजे रिट याचिकाओं के फैसले पर निर्भर होगा। ऐसे में कुछ उम्मीदवारों को जीत के बाद भी हार का सामना करना पड़ सकता है।

सिर्फ 2 को आरक्षण सीमा से राहत

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीजेआई ने साफ तौर से कहा कि आगे के चुनाव में किसी भी कीमत पर आरक्षण की सीमा 50% को पार नहीं होना चाहिए। इस पर केवल दो नगर निगमों (नागपुर- चंद्रपुर) में आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन नगर निगमों के चुनाव भी होने चाहिए, लेकिन उसका परिणाम भी इस मामले के अंतिम फैसले पर निर्भर होंगे। इस वजह से नागपुर- चंद्रपुर मनपा के चुनाव पर भी ग्रहण लगने की बात कही जा रही है।

2 दिसंबर को अवकाश

महाराष्ट्र सरकार ने दी दिसंबर को सवैतनिक अवकाश घोषित किया है ताकि वे नगर परिषदों और नगर पंचायतों के चुनावों में मतदान कर सकें।

प्रचार की समय-सीमा बढ़ी

राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर परिषद और नगर पंचायत चुनाव में प्रचार की अंतिम तिथि बढ़ा अब दिसंबर 2025 रात 10 बजे तक कर दी है, जिन प्रात्याणियों को देर से चुनाव विन्ह मिला या नामांकन प्रक्रिया में देरी हुई थी, उन्हें बड़ी राहत मिली है।

क्या है मामला

महाराष्ट्र में ओबीसी आरक्षण पर चल रहे विवाद के कारण निकाय चुनाव जो 2021 से लंबित है। दिसंबर, 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था ई ‘ट्रिपल-टेस्ट’ को पूरा करने के बाद ही ओबीसी आरक्षण लागू किया जा सकता है। बाद में राज्य सरकार ने मार्च 2022 में जयंत कुमार बंठिया कमीशन बनाया। बंठिया कमीशन ने जुलाई 2022 में अपनी रिपोर्ट सौंप दी।

यह भी पढ़ें – 1 साल तक नहीं होगी किसानों से ऋण वसूली, फडणवीस सरकार का बड़ा फैसला, 347 तहसीलों के किसानों को राहत

हालांकि मई, 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने पहले के कानून के मुताबिक यानी ओबीसी को 26 प्रतिशत आरक्षण देते हुए चार महीने के अंदर निकाय चुनाव कराने का निर्देश दिया। लेकिन अब कोर्ट ने कहा कि राज्य के अधिकारियों ने इस आदेश का गलत मतलब निकाला कि आरक्षण 50% से ज़्यादा हो सकता है।

जिसे लेकर अब विवाद बढ़ गया है। लेकिन राहत की बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने निकाय चुनाव को रद्द नहीं किया है।। कोर्ट ने साफ़ किया है कि किसी भी हालात में आरक्षण की 50% की लिमिट पार करने की इजाज़त नहीं है।

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Published On: Nov 29, 2025 | 06:57 AM

Topics:  

  • Maharashtra
  • Maharashtra Local Body Elections
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