धीरेंद्र शास्त्री और अविमुक्तेश्वरानंद, फोटो- सोशल मीडिया
Dhirendra Shastri on Shankaracharya Controversy: बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने प्रयागराज माघ मेले में चल रहे शंकराचार्य विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दोनों पक्षों से बातचीत के जरिए रास्ता निकालने और सनातन धर्म की गरिमा बनाए रखने का आग्रह किया है।
प्रयागराज माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच उपजा विवाद अब चर्चा का विषय बना हुआ है। इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि इस विवाद में शामिल दोनों पक्ष सनातनी हैं और हमारे अपने ही लोग हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब अपने ही लोग आपस में उलझते हैं, तो इससे बाहरी दुनिया को सनातन धर्म का उपहास करने का मौका मिलता है।
पंडित शास्त्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस पूरे प्रकरण में जो हास्य-परिहास (मजाक) हो रहा है, वह बिल्कुल भी ठीक नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों पक्षों को एक मेज पर बैठकर शालीनता से बात करनी चाहिए ताकि कोई ऐसा समाधान निकले जिससे धर्म की हानि न हो। उनके अनुसार, सनातन धर्म पहले से ही कई बाहरी चुनौतियों का सामना कर रहा है, इसलिए आंतरिक मतभेदों को सार्वजनिक रूप से बढ़ाना उचित नहीं है।
विवाद पर टिप्पणी करने के साथ-साथ धीरेंद्र शास्त्री ने आज की आधुनिक पीढ़ी, जिसे वे ‘जेन जी’ (Gen Z) और ‘अल्फा-बीटा’ पीढ़ी कह रहे हैं, को भी विशेष नसीहत दी है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि आज के युवा सोशल मीडिया के आभासी जाल में फंसकर अपना कीमती समय नष्ट कर रहे हैं।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे मोबाइल की दुनिया से बाहर निकलकर ‘रियल’ यानी वास्तविक जीवन में सक्रिय हों। शास्त्री ने जोर देकर कहा कि युवाओं को अपनी जमीन से जुड़ना चाहिए और अपने परिवार को पर्याप्त समय देना चाहिए। उनके अनुसार, परिवार और संस्कारों से जुड़ाव ही समाज को मजबूत बना सकता है, जबकि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग केवल भटकाव पैदा करता है।
कथा के दौरान गौ सेवा का मुद्दा उठाते हुए बागेश्वर धाम सरकार ने एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि केवल गौशालाएं खोलने या उनमें गायों को रखने से गौ माता की दुर्दशा समाप्त नहीं होगी। इसके समाधान के रूप में उन्होंने एक पुरानी परंपरा को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया।
धीरेंद्र शास्त्री ने नारा दिया कि “एक हिंदू, एक गाय” की परंपरा को वापस लाना होगा। उनके अनुसार, यदि प्रत्येक सनातनी परिवार कम से कम एक गाय की सेवा का संकल्प ले, तो समाज में गौ माता का संरक्षण स्वतः ही सुनिश्चित हो जाएगा। यह संदेश उन्होंने कोटा में उमड़ी हजारों की भीड़ के बीच दिया, जहां वे अपनी कथा के माध्यम से लोगों को धर्म और सेवा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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अंत में, धीरेंद्र शास्त्री ने सरकार और संत समाज, दोनों से ही लचीला रुख अपनाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन को संतों की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए और संतों को भी व्यवस्था के साथ तालमेल बिठाना चाहिए। उन्होंने अपील की कि दोनों पक्ष मिलकर बीच का रास्ता निकालें ताकि इस विवाद का शांतिपूर्ण और सम्मानजनक अंत हो सके। गौरतलब है कि प्रयागराज के माघ मेले में सुविधाओं और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर अविमुक्तेश्वरानंद और अधिकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान ने अब इस विवाद में एक नई दिशा देने का प्रयास किया है।