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क्यों ‘अजातशत्रु’ कहलाए अटल? हार न मानने वाले उस महानायक की कहानी, जिसने पोखरण से दुनिया को हिलाया
- Written By: मनोज आर्या
Atal Bihari Vajpayee: भारतीय राजनीति के इतिहास में कुछ ही नाम ऐसे हैं जो विचार, भाषा और आचरण- तीनों स्तरों पर एक साथ स्मरण किए जाते हैं। अटल बिहारी वाजपेयी ऐसा ही एक नाम है।

अटल बिहारी वाजपेयी, (डिजाइन फोटो/AI)
Atal Bihari Vajpayee Birth Anniversary Special: अटल बिहारी वाजपेयी को भारतीय राजनीति का ‘भीष्म पितामह’ कहा जाता है। उनका राजनीतिक सफर जितना लंबा था, उतना ही विशाल उनका व्यक्तित्व था। मध्य प्रदेश के ग्वालियर के एक साधारण शिक्षित परिवार में 25 दिसंबर 1924 को जन्मे अटल जी की राष्ट्रवादी सोच छात्र जीवन में ही प्रखर हो गई थी। 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ से उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत हुई। वे बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गए थे और बाद में उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया। पत्रकारिता से करियर शुरू करने वाले वाजपेयी ने अपनी लेखनी और वाणी के जरिए राष्ट्रवाद की अलख जगाई।
जनसंघ से भाजपा नेतृत्व तक का सफर
अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। 1951 में वे जनसंघ के महासचिव बने और 1957 में पहली बार सांसद के रूप में लोकसभा पहुंचे। उनकी वाकपटुता ने तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू को भी प्रभावित किया था। 1980 में जब जनसंघ का पुनर्गठन हुआ, तो अटल जी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संस्थापक अध्यक्ष बने। उनके नेतृत्व में ही भाजपा ने एक छोटे संगठन से देश की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति बनने तक का सफर तय किया। उन्होंने उदार विचारधारा और लोकतांत्रिक मूल्यों को पार्टी का आधार बनाया, जिससे भाजपा को जन-जन की लोकप्रियता मिली।

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तीन बार रहे भारत के प्रधानमंत्री
अटल जी को तीन बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। पहली बार 1996 में वे मात्र 13 दिनों के लिए प्रधानमंत्री बने। इसके बाद 1998 से 1999 और अंततः 1999 से 2004 तक उन्होंने सफलतापूर्वक अपना कार्यकाल पूरा किया। पंडित नेहरू के बाद वे एकमात्र नेता थे जो लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बने। उनके कार्यकाल में भारत ने परमाणु शक्ति के रूप में पोखरण में अपनी धमक दिखाई। साथ ही, उन्होंने स्वर्णिम चतुर्भुज योजना और ग्रामीण सड़क योजना जैसी परियोजनाओं के माध्यम से देश के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने का सपना पूरा किया।

नाम की तरह ‘अटल’ विचार
संसद में चार दशकों से अधिक समय तक सक्रिय रहते हुए वाजपेयी जी ने नौ बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा का प्रतिनिधित्व किया। वे न केवल एक कुशल राजनेता थे, बल्कि एक संवेदनशील कवि और संगीत प्रेमी भी थे। उनकी कविताएं राष्ट्रवाद और मानवीय संवेदनाओं का मिश्रण होती थीं। विदेश मंत्री के रूप में उन्होंने भारत की विदेश नीति को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। 1994 में उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ सांसद’ के खिताब से नवाजा गया और बाद में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया। उनके नाम की तरह ही उनके विचार ‘अटल’ रहे।

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व्यक्तिगत जीवन और प्रेरणादायी विरासत
अटल जी का जीवन चुनौतियों से भी भरा रहा। 2002 के गुजरात दंगों जैसी घटनाओं के समय उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने सदैव ‘राजधर्म’ निभाने की बात की। व्यक्तिगत जीवन में वे आजीवन अविवाहित रहे और अपनी दत्तक पुत्री नमिता भट्टाचार्य के परिवार के साथ रहे। एक आधुनिक, शक्तिशाली और आत्मविश्वासी भारत का सपना देखने वाले अटल जी आज भी करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनकी ईमानदारी, विनम्रता और सबको साथ लेकर चलने की कला उन्हें विश्व राजनीति का एक अविस्मरणीय सितारा बनाती है।
Atal bihari vajpayee 101 birth anniversary know their political journey and legacy
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