असम लेबर वेलफेयर फंड घोटाला: ED ने मुख्य आरोपी को दबोचा, मजदूरों के ₹121 करोड़ डकारने का आरोप
Assam News: प्रवर्तन निदेशालय ने असम लेबर वेलफेयर फंड घोटाले में प्रियांशु बोइरागी को गिरफ्तार किया है। उन पर अधिकारियों के साथ मिलकर निर्माण मजदूरों के सेस की करोड़ों की राशि हड़पने का आरोप है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
प्रतीकात्मक फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
Assam Labour Welfare Fund Scam: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने असम के बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड में हुए करोड़ों के वित्तीय घोटाले के मुख्य आरोपी प्रियांशु बोइरागी को गिरफ्तार कर लिया है। मनी लॉन्ड्रिंग के इस गंभीर मामले में विशेष अदालत ने आरोपी को 5 दिनों की ईडी कस्टडी में भेज दिया है। 18 दिसंबर को गुवाहाटी में एम/एस पूर्वाश्री प्रिंटिंग हाउस के प्रोप्राइटर प्रियांशु बोइरागी के ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया। बाद में उन्हें प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया। ईडी ने आरोपी को गुवाहाटी स्थित विशेष पीएमएलए कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 5 दिनों की ईडी की कस्टडी में भेज दिया गया है।
प्रियांशु बोइरागी, जो एम/एस पूर्वाश्री प्रिंटिंग हाउस के प्रोप्राइटर हैं, पर आरोप है कि उन्होंने बोर्ड के तत्कालीन सदस्य सचिव चोहन दोले और तत्कालीन अध्यक्ष गौतम बरुआ के साथ मिलकर एक गहरी आपराधिक साजिश रची। यह पूरा घोटाला उस राशि से जुड़ा है जिसे निर्माण लागत के 1 प्रतिशत सेस के रूप में मजदूरों के कल्याण के लिए वसूला जाता है। यह धन निर्माण मजदूरों की दुर्घटना सहायता, मृत्यु लाभ, इलाज, पेंशन, मातृत्व लाभ और बच्चों की शिक्षा जैसी अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं के लिए निर्धारित था, लेकिन घोटालेबाजों ने इस फंड को धोखे से निकाल लिया।
फर्जी टेंडर और ₹121 करोड़ का फर्जीवाड़ा
ईडी की जांच के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2013-14 से 2015-16 के बीच ₹121.05 करोड़ के प्रिंटिंग कॉन्ट्रैक्ट फर्जी और मनगढ़ंत टेंडर प्रक्रिया के जरिए प्रियांशु बोइरागी को दिए गए थे। इसमें से ₹118.55 करोड़ की राशि उनके व्यावसायिक खाते में जमा की गई। यह पूरी कार्रवाई असम के मुख्यमंत्री स्पेशल विजिलेंस सेल द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी।
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शेल कंपनियों और लग्जरी कारों का खेल
जांच एजेंसी ने खुलासा किया कि इस अवैध कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) को छुपाने के लिए आरोपी ने बड़ी रकम अपने निजी फिक्स्ड डिपॉजिट में बदल दी। इसके अलावा, पैसे के स्रोत को उलझाने के लिए दिल्ली स्थित कई शेल कंपनियों के जरिए फंड को घुमाया गया। ईडी ने हालिया छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ एक ऑडी कार भी जब्त की है। गौरतलब है कि इस मामले में पहले भी ₹34.03 करोड़ की राशि और एफडी को अटैच किया जा चुका है। इस गिरफ्तारी के बाद अब बोर्ड के कई अन्य भ्रष्ट अधिकारियों पर भी शिकंजा कसने की संभावना है।
