भाजपा असम के पोस्ट किए वीडियो के स्क्रीनग्रैब्स, फोटो- सोशल मीडिया
Himanta Biswa Sarma Provocative Video: असम की राजनीति में एक बार फिर सांप्रदायिक तनाव और बयानबाजी का मुद्दा गरमा गया है। भाजपा के आधिकारिक X हैंडल पर साझा किए गए एक AI-जनरेटेड वीडियो ने देश भर में आक्रोश पैदा कर दिया है। इस वीडियो में मुख्यमंत्री को हिंसा को बढ़ावा देते हुए दिखाने का आरोप लगा है, जिसके बाद इसे डिलीट कर दिया गया।
शनिवार को असम बीजेपी यूनिट के ऑफिशियल एक्स हैंडल पर एक बेहद भड़काऊ वीडियो पोस्ट किया गया। इस वीडियो क्लिप में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के राइफल संभालते हुए असली फुटेज को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से जनरेट की गई तस्वीरों के साथ जोड़ा गया था। वीडियो में दिखाया गया कि मुख्यमंत्री प्रतीकात्मक रूप से उन लोगों पर निशाना साध रहे हैं जिन्हें ‘मिया’ या बंगाली मूल के मुसलमानों के रूप में चित्रित किया गया है।
वीडियो में केवल दृश्य ही नहीं, बल्कि लिखे गए वाक्य भी आक्रामक थे। इसमें ‘पॉइंट ब्लैंक शूट’, ‘नो मर्सी’ और ‘बांग्लादेशियों को कोई माफी नहीं’ जैसे वाक्यांशों का उपयोग किया गया था। इसके अलावा, वीडियो में “तुम पाकिस्तान क्यों नहीं गए?” जैसे सवाल भी पूछे गए थे, जो सीधे तौर पर एक विशेष समुदाय के खिलाफ नफरत और हिंसा को बढ़ावा देने वाले माने जा रहे हैं।
एक सोशल मीडिया यूजर ने इसे अपने प्रोफाइल पर शेयर किया-
BJP Assam Deletes Himanta’s Point-Blank Shot Video. pic.twitter.com/0OtQJ2qRDY — Sandeep Panwar (@tweet_sandeep) February 8, 2026
इस वीडियो के सोशल मीडिया पर आते ही व्यापक निंदा शुरू हो गई। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद सागरिका घोष ने इस विज्ञापन को बेहद शर्मनाक बताते हुए इसके लिए जिम्मेदार लोगों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की है।, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को टैग करते हुए इस पर कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया।
Shameful. Whoever has made this ad 👇🏽 needs to be IMMEDIATELY arrested . You need to act @narendramodi @AmitShah @AshwiniVaishnaw https://t.co/VX5Axd1wKe — Sagarika Ghose (@sagarikaghose) February 7, 2026
आलोचकों का तर्क है कि इस तरह की सामग्री साझा करने से समाज में नफरत फैलती है और यह देश के शीर्ष नेतृत्व के व्यवहार पर सवालिया निशान लगाती है। विरोध इतना बढ़ गया कि भाजपा को अंततः अपना यह विवादित ट्वीट डिलीट करना पड़ा, लेकिन तब तक इसके स्क्रीनग्रैब और वीडियो क्लिप्स इंटरनेट पर वायरल हो चुके थे।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि इस तरह के भड़काऊ वीडियो जानबूझकर असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए जारी किए जाते हैं। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने लिखा कि जब राज्य बाढ़, बेरोजगारी और बढ़ती महंगाई जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है, तब भाजपा का आईटी सेल ऐसे नफरती वीडियो के जरिए लोगों का ध्यान बांटने की कोशिश कर रहा है।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि ऐसी बयानबाजी असम के सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर बंगाली मूल के मुसलमानों को हाशिए पर धकेलने की एक सोची-समझी रणनीति है। इन लोगों के पास भारतीय नागरिकता होने के बावजूद, उन्हें अक्सर ‘बाहरी’ या ‘अवैध अप्रवासी’ के रूप में स्टीरियोटाइप किया जाता रहा है।
यह घटना मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के उन हालिया बयानों के बाद हुई है जिनमें उन्होंने सीधे तौर पर ‘मिया’ लोगों को निशाना बनाया था। डिगबोई में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से मिया समुदाय के लोगों को परेशान करने का आग्रह किया था, जैसे कि उनके रिक्शे का किराया कम देना। उन्होंने चुनावी रोल में बदलाव करके भी इस समुदाय को हाशिए पर लाने की मंशा जताई थी।
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एक्टिविस्ट्स का तर्क है कि मुख्यमंत्री स्तर के व्यक्ति द्वारा ऐसी हिंसात्मक और भेदभावपूर्ण बयानबाजी राज्य की अखंडता और सामाजिक सद्भाव के लिए खतरा पैदा कर सकती है। वर्तमान में यह मामला न केवल असम, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और सरकार से इस ‘नफरती कंटेंट’ के निर्माताओं पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।