दरगाह किसी के बाप की नहीं…अजमेर शरीफ एक बार फिर विवादों में, सरवर चिश्ती की प्रशासन को खुली चुनौती
Ajmer Sharif में नवाज की दरगाह फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह इबादत नहीं बल्कि एक नया सरकारी फरमान है। दरगाह कमेटी ने खादिमों के लिए जियारत कराने हेतु लाइसेंस अनिवार्य करने पर विवाद भड़क उठा।
- Written By: सौरभ शर्मा
अजमेर में लाइसेंस विवाद पर भड़के सरवर चिश्ती (फोटो- सोशल मीडिया)
Ajmer Dargah License Controversy: अजमेर शरीफ में ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह इबादत नहीं बल्कि एक नया सरकारी फरमान है। दरगाह कमेटी ने खादिमों के लिए जियारत कराने हेतु लाइसेंस अनिवार्य करने की बात कही तो विवाद भड़क उठा। अंजुमन कमेटी के सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कह दिया है कि दरगाह किसी के बाप की जागीर नहीं है, यह एक इस्लामिक संस्था है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि खादिम समुदाय को हल्के में लेने की गलती न की जाए।
दरअसल, यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब दो दिन पहले दरगाह कमेटी के नाजिम मोहम्मद बिलाल खान ने एक विज्ञापन जारी कर दिया। इसमें 15 जनवरी से खादिमों को जियारत कराने के लिए लाइसेंस आवेदन करने को कहा गया था। इस प्रक्रिया के शुरू होने से पहले ही खादिम समुदाय ने इसका कड़ा विरोध कर दिया है। चिश्ती ने इसे मुगलकालीन परंपराओं के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह संस्था मुगल सल्तनत के दौरान बनी थी और इस पर खादिमों का हक है। उन्होंने साफ किया कि अन्य संस्थाओं की तरह यहां मनमर्जी के फैसले नहीं चलेंगे।
दस हजार खादिमों की फौज
सरवर चिश्ती का गुस्सा यहीं नहीं रुका। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि अगर उन्हें मजबूर किया गया तो परिणाम गंभीर होंगे। उनके मुताबिक, खादिम समुदाय के पास 10 हजार से ज्यादा लोग हैं जो जरूरत पड़ने पर दरगाह को भर सकते हैं। यही नहीं, देश-दुनिया में उनके लाखों अनुयायी हैं। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि प्रशासन उन्हें कमजोर समझने की भूल न करे और न ही उन्हें मजबूर करे। चिश्ती ने आरोप लगाया कि दरगाह के नाजिम की नियुक्ति ही गलत तरीके से हुई है, इसलिए उनके माध्यम से जारी नोटिस और आदेश को कोई बर्दाश्त नहीं करेगा।
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नहीं मानेंगे तुगलकी फरमान
चिश्ती ने कहा कि दरगाह में अतिक्रमण और अव्यवस्था पर कोई बात नहीं करता, न ही कभी खादिमों से सलाह ली जाती है। उनके मेंटेनेंस रजिस्टर तक नहीं देखे जाते, बस अचानक से नए नियम थोप दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि कैमरों की निगरानी या कर्मचारियों की तैनाती पर बात होनी चाहिए, लेकिन लाइसेंस की शर्त मंजूर नहीं है। उन्होंने इसे तुगलकी फरमान करार देते हुए चुनौती दी कि लाइसेंस की प्रक्रिया शुरू करके देखें, कोई भी खादिम इस आदेश को नहीं मानेगा। अंजुमन कमेटी ने स्पष्ट कर दिया है कि सभी धर्मों की आस्था के इस केंद्र पर ऐसे फैसले कभी लागू नहीं होने दिए जाएंगे।
