रमजान का पाक महीना (सौ. Gemini)
Ramzan Mistakes: रमजान का पाक महीना अभी चल रहा है। यह महीना मुस्लिम समुदाय के लिए बहुत ही पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। रमजान के दौरान मुसलमान भाई-बहन सुबह से सूर्यास्त तक रोज़ा रखते हैं, यानी खाना, पानी और अन्य सांसारिक सुखों से परहेज करते हैं।
इस्लामिक धर्म गुरु के अनुसार, रमजान के महीने में रोजा रखने और इबादत करने के कई महत्वपूर्ण नियम हैं, जिनका पालन करना हर रोजेदार के लिए जरूरी होता है। जो इसप्रकार है-
समय: रोजा सुबह सूरज निकलने से पहले सहरी के साथ शुरू होता है और सूर्यास्त के समय इफ्तार के साथ खोला जाता है।
ब्रह्मचर्य का पालन: इस दौरान कुछ भी खाने-पीने, धूम्रपान करने और शारीरिक संबंध बनाने की सख्त मनाही होती है।
नियत: रोजा रखने के लिए दिल में साफ इरादा यानी ‘नियत’ करना जरूरी है कि आप यह रोजा सिर्फ अल्लाह की रजा के लिए रख रहे हैं।
जानबूझकर खाना-पीना: अगर आप जानबूझकर थोड़ा भी पानी पीते हैं या कुछ खाते हैं, तो रोजा टूट जाएगा।
बुरा व्यवहार: झूठ बोलना, चुगली करना, गाली देना, गुस्सा करना या किसी का दिल दुखाना रोजे की रूह को कमजोर करता है और कुछ मान्यताओं में इसे रोजा टूटने का कारण माना जाता है।
भूलवश खाना: अगर आप भूल से कुछ खा-पी लें और याद आते ही रुक जाएं, तो रोजा कायम रहता है।
मेडिकल: इंजेक्शन लगवाना (ताकत वाला न हो), खून की जांच कराना, आंख में दवा डालना, या भूलवश थूक निगलने से रोजा नहीं टूटता।
नहाना: रोजे की हालत में नहाने या इत्र (परफ्यूम) लगाने की अनुमति है।
इस्लाम में बीमार, यात्री, गर्भवती, स्तनपान कराने वाली महिलाएं, अत्यधिक वृद्ध लोग, और मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को रोज़े रखने से छूट है। यह छूट सेहत को नुकसान से बचाने के लिए दी जाती है, और बाद में इन छूटे हुए रोज़ों को कज़ा (बाद में रखना) या फिदया (गरीबों को खाना खिलाना) के द्वारा पूरा किया जा सकता है।
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नमाज और कुरान: पांच वक्त की नमाज पढ़ना और कुरान की तिलावत करना इस महीने में बहुत पुण्य का काम माना जाता है।
दान : अपनी कमाई का कुछ हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को देना रमजान की सबसे बड़ी नेकियों में से एक है।