
ओवैसी और तेजस्वी (डिजाइन)
Bihar Assembly Elections: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने सीमांचल को एक बार फिर राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को मिली बढ़त ने न केवल राजद के पारंपरिक एमवाई वोट बैंक को चुनौती दी है, बल्कि अपने पिछले प्रदर्शन को दोहराते हुए अपनी राजनीतिक उपस्थिति भी दर्ज कराई है।
गौरतलब है कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम ने सीमांचल की पांच सीटों- आमौर, कोचाधामन, बहादुरगंज, जोकीहाट और बैसी पर जीत हासिल की थी, जिसे राजनीतिक विश्लेषकों ने एक बड़ा संकेत माना था। इस बार भी यही तस्वीर उभरती दिख रही है।
जोकीहाट सीट पर एआईएमआईएम उम्मीदवार मोहम्मद मुर्शीद आलम ने लगभग 28,803 वोटों से जीत गए हैं। मुर्शीद को अब तक 83,737 वोट मिले हैं। जदयू के मंज़र आलम दूसरे स्थान पर हैं। जनसुराज के सरफराज आलम 35,354 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे, जबकि AIMIM के पूर्व विधायक और राजद प्रत्याशी शाहनवाज चौथे स्थान पर रहे।
एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने अमौर विधानसभा क्षेत्र में एक बार फिर शानदार जीत हासिल की। उन्होंने जदयू उम्मीदवार सबा ज़फर को 38,928 वोटों से हराया। अख्तरुल ईमान को 108,836 वोट मिले, जबकि सबा ज़फर को 69,908 वोट मिले। कांग्रेस के अब्दुल जलील मस्तान तीसरे स्थान पर रहे। सीमांचल में मुकाबला अब पूरी तरह से राजद बनाम एआईएमआईएम होता जा रहा है।
बैसी विधानसभा क्षेत्र में एआईएमआईएम के गुलाम सरवर 87,147 वोटों के साथ पहले स्थान पर बने हुए हैं। वह भाजपा उम्मीदवार विनोद यादव से 23,257 वोट आगे हैं। राजद के अब्दुल सुभान तीसरे स्थान पर हैं। यह सीट 2020 में भी एआईएमआईएम के पास थी। पार्टी इस बार भी अपनी स्थिति बरकरार रखती दिख रही है।
बहादुरगंज सीट पर एआईएमआईएम उम्मीदवार मोहम्मद तौसीफ आलम 87,315 वोटों के साथ पहले स्थान पर हैं। उन्होंने लोजपा (आर) के कलीमुद्दीन को 28,726 वोटों से हरा दिया है। कांग्रेस तीसरे स्थान पर खिसक गई है। यह सीमांचल में एआईएमआईएम के प्रभाव का एक और सबूत है।
कोचाधामन सीट पर एआईएमआईएम के मोहम्मद सरवर आलम ने राजद के मुजाहिद आलम को 23,021 वोटों से हराया। भाजपा तीसरे और जनसुराज उम्मीदवार पांचवें स्थान पर रहे। राजद का यह प्रदर्शन साफ तौर पर दर्शाता है कि सीमांचल में राजद का पारंपरिक वोट बैंक बिखरने लगा है।
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ये नतीजे साफ तौर पर संकेत देते हैं कि एआईएमआईएम ने अपने 2020 के प्रदर्शन को दोहराया है। इसने राजद के एम-वाई समीकरण को चुनौती दी है और सीमांचल की राजनीति में एक बार फिर अपना दबदबा कायम किया है। अगर यही सिलसिला जारी रहा तो सीमांचल के नतीजे राजद और महागठबंधन के समीकरणों को पूरी तरह बदल सकते हैं।






