बहादुर मेजर सोमनाथ शर्मा
नवभारत डेस्क: भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट की 4वीं बटालियन की डेल्टा कंपनी के कमांडर मेजर सोमनाथ शर्मा जिनको जिन्होने अकेले ही 500 पाकिस्तानी सैनिकों के छक्के छुड़ा दिए थे। इसमें कोई दोहराई नहीं है कि भारत मां ने सैकड़ों वीर सैनिकों को जन्म दिया, और उन वीर सैनिकों ने बाखूबी अपनी जान की चिंता ना करते हुए भारत मां पर आने वाली सभी परेशानियों को अपने सिर लिया। इन्हीं में एक थे मेजर सोमनाथ शर्मा जिन्हे भारत के इतिहास का पहला परमवीर चक्र दिया गया था। आज हम याद करों कुर्बानी में मेजर सोमनाथ शर्मा के वीर गाथा के बारे में जानेंगे।
मेजर सोमनाथ शर्मा (31 जनवरी 1923 – 3 नवंबर 1947) भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट की 4वीं बटालियन की डेल्टा कंपनी के कंपनी कमांडर थे, जिन्होंने अक्टूबर-नवंबर 1947 के भारत-पाक संघर्ष में भाग लिया था। देश के लिए अपनी जान गवाने वाले शहीद भारत मां के पुत्र बहादुर मेजर सोमनाथ को भारत सरकार द्वारा परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। वे परमवीर चक्र पाने वाले पहले व्यक्ति हैं।
मेजर सोमनाथ की वीरगाथा की बात करें तो भारत माता के इस वीर सपूत ने अकेले ही 500 पाकिस्तानी सैनिकों से लोहा लिया और फिर उन्हें धूल चटा दी। जब भी भारत के सबसे बड़े दुश्मन पाकिस्तान ने धरती के स्वर्ग कश्मीर पर कब्ज़ा करने की कोशिश की है, भारतीय सेना ने उन्हें परास्त किया है। कश्मीर पर कब्ज़ा करने की पाकिस्तान की साजिश को नाकाम करने के लिए मेजर सोमनाथ शर्मा को सबसे पहले देश का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार दिया गया था। ये वही वीर योद्धा हैं जिन्हें आज़ाद भारत में पहला परमवीर चक्र मिला था। उन्होंने महज 24 साल की उम्र में शहादत प्राप्त की थी।
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मेजर सोमनाथ शर्मा ने तीन नवंबर 1947 को इतिहास रच दिया था, जहां उन्होने अपनी जान गवां कर पाकिस्तानी सैनिकों के गलत इरादे को नाकाम किया था। सोमनाथ शर्मा ने अपनेअकेले के दम पर हीपाकिस्तानी ट्राइब फोर्सेज के 700 जवानों को रोके रखा था। दुश्मन लगातार मोर्टार दागकर भारती सेना पर हमला कर रहे थे। लेकिन ऐसी स्थिति में भी मेजर सोमनाथ शर्मा ने साहस न छोड़ा और पाकिस्तान के मंसूबों को ढेर कर दिया। जानकारी के लिए बता दें कि मेजर सोमनाथ शर्मा को उनकी बहादुरी के लिए मरणोपरांत 26 जनवरी 1950 को परमवीर चक्र दिया गया था, जिसे उनके स्वजनों ने लिया था।
मेजर सोमनाथ की बात करें तो 1942 में सोमनाथ शर्मा को भारतीय सेना के 19वीं हैदराबाद रेजिमेंट की 8वीं बटालियन में कमीशन मिला। जहां उन्होने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बर्मा में अराकान अभियान में भाग लिया। इसके बाद में उन्होंने 1947 के भारत-पाक युद्ध में लड़ाई लड़ी और 3 नवंबर 1947 को श्रीनगर हवाई अड्डे से पाकिस्तानी घुसपैठियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए। जानकारी के लिए बता दें कि अपने सैन्य करियर के दौरान मेजर सोमनाथ शर्मा अपने कैप्टन के.डी. वासुदेव की बहादुरी से बहुत प्रभावित थे। कैप्टन वासुदेव ने 8वीं बटालियन के साथ भी काम किया, जिसमें उन्होंने मलाया अभियान में भाग लिया, जिसके दौरान उन्होंने जापानी हमले से सैकड़ों सैनिकों की जान बचाई।
भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के जवानों ने आजादी के 75 सालों में हर बार भारत को गौरवान्वित किया है। वीर जवानों ने हमेशा अपनी जान की परवाह किए बिना दुश्मनों को हराया है। जब भी देश की सेना, वायुसेना और नौसेना के वीर जवानों ने दुश्मनों को हराया है, तो उन्हें उनके बलिदान, वीरता और बलिदान के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया है। देश के राष्ट्रपति द्वारा वीर जवानों को परमवीर चक्र से सम्मानित किया जाता है।
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चलिए अब आपको बताते है कि अब तक कितने लोगों परमवीर चक्र, इन 21 सैनिकों को उनकी असाधारण बहादुरी के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया है। जिनमें ये निम्नलिखित नाम शामिल है।
1. मेजर सोमनाथ शर्मा
2. लांस नायक करम सिंह
3. लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे
4. नायक जदुनाथ सिंह
5. हवलदार मेजर पीरू सिंह
6. कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया
7. मेजर धन सिंह थापा
8. सूबेदार जोगिंदर सिंह
9. मेजर शैतान सिंह
10. अब्दुल हमीद
11. शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल अर्देशिर बुर्जोरजी तारापोर
12. अल्बर्ट एक्का
13. मेजर होशियार सिंह
14. सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल
15. फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों
16. मेजर परमेश्वरन
17. सूबेदार बन्ना सिंह
18. विक्रम बत्रा
19. कैप्टन मनोज पांडे
20. बेदार मेजर संजय कुमार
21. कैप्टन योगेन्द्र सिंह यादव
अब अगर परमवीर चक्र के साथ मिलने वाली सुविधाओं की बात करें तो परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले योद्धाओं को सरकार की ओर से कई सुविधाएं भी दी जाती हैं। परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले वीर सैनिक को नकद भत्ता दिया जाता है। वर्ष 1996 से परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले सैनिक को 3000/- रुपये प्रति माह दिया जाता है। अगर ये पदक एक से अधिक बार मिलता है तो उसी अनुपात में बढ़ती जाती है।