10 साल की बच्ची ने 5 लोगों को दी जिंदगी, एलिन शेरिन अब्राहम ने किया अंगदान
Infant Organ Donation Story: 10 माह की एलिन शेरिन अब्राहम केरल की सबसे कम उम्र की अंगदाता बन गई है। इसके मां-पापा ने उसका लिवर, किडनी, हार्ट वाल्व, कॉर्निया दान किया। इससे 5 लोगों को नई जिंदगी मिली।
- Written By: रंजन कुमार
एलिन शेरिन अब्राहम। इमेज-सोशल मीडिया
Youngest Organ Donor in India : केरल से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो गहरी उदासी के बीच भी उम्मीद की एक बेमिसाल किरण जगाती है। महज 10 महीने की मासूम एलिन शेरिन अब्राहम, जो अभी ठीक से बोलना भी नहीं सीखी थी, जाते-जाते पांच लोगों को नई जिंदगी का अनमोल तोहफा दे गई।
अस्पताल में ब्रेन-डेड घोषित होने के बाद एलिन केरल की सबसे कम उम्र की अंगदाता (ऑर्गन डोनर) बन गई है। पठानमथिट्टा जिले की रहने वाली नन्ही एलिन के माता-पिता, अरुण अब्राहम और शेरिन एन जॉन के लिए यह फैसला लेना आसान नहीं था।
दुख की घड़ी में भी मां-बाप ने दिखाया साहस
जिस बच्ची को वे अपनी आंखों का तारा समझते थे, उसे खोने का गम शब्दों से परे था। मगर, दुख की इस घड़ी में भी उन्होंने साहस दिखाया और अपनी बेटी के अंग दान करने का फैसला किया। एलिन का लिवर, दो किडनियां, हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान किए गए। इस नेक पहल से एक छह महीने के मासूम को नया लिवर मिला, जो राज्य में मरणोपरांत लिवर ट्रांसप्लांट पाने वाला सबसे छोटा बच्चा बन गया है।
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एक हादसे ने छीनी मासूमियत
इस पूरी त्रासदी की शुरुआत 5 फरवरी को हुई, जब पल्लम बोरमा जंक्शन पर एलिन का परिवार एक भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गया। सामने से आ रही एक तेज रफ्तार कार ने उनकी गाड़ी को टक्कर मार दी थी। इस दुर्घटना में एलिन के सिर पर गंभीर चोटें आईं, जबकि उसकी मां और दादा-दादी भी बुरी तरह घायल हो गए। तिरुवल्ला में शुरुआती इलाज के बाद उसे कोच्चि ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद 13 फरवरी को उसे ब्रेन-डेड घोषित कर दिया गया।
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मानवता की अनूठी मिसाल
स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने इस साहसी परिवार का आभार जताते हुए कहा कि एलिन के माता-पिता का यह फैसला समाज के लिए एक प्रेरणा है। अंगों को समय पर पहुंचाने के लिए पुलिस और गृह विभाग ने ग्रीन कॉरिडोर के जरिए अंगों को कोच्चि से तिरुवनंतपुरम के विभिन्न अस्पतालों तक पहुंचाया। एलिन अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी आंखों से कोई दुनिया देखेगा और उसकी धड़कनें किसी और के जीवन में सुनाई देंगी। यह घटना हमें सिखाती है कि मृत्यु के बाद भी हम किसी के जीवन का आधार बन सकते हैं।
