5 राज्य जहां 2026 में होगी चुनावी जंग, फोटो- सोशल मीडिया
2026 Assembly Election: साल 2026 भारत के लिए पूरी तरह ‘चुनावी साल’ रहने वाला है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों के साथ-साथ 75 राज्यसभा सीटों और यूपी के पंचायत चुनावों पर सबकी निगाहें टिकी हैं, जो देश की भावी राजनीतिक दिशा तय करेंगे।
साल 2025 के विदा होने के साथ ही देश 2026 के चुनावी मोड में दाखिल हो गया है। इस वर्ष केवल राज्यों की सरकारें ही नहीं चुनी जाएंगी, बल्कि केंद्र की राजनीति का संतुलन भी प्रभावित होगा। अप्रैल से नवंबर 2026 के बीच देश की 75 राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश की 10, बिहार की 5, महाराष्ट्र की 7 और राजस्थान-मध्य प्रदेश की 3-3 सीटें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र में बीएमसी सहित 29 महानगरों के निकाय चुनाव और उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव इस साल को बेहद अहम बना देते हैं।
पश्चिम बंगाल में 294 सीटों के लिए महासंग्राम होना है, जहां ममता बनर्जी 2011 से सत्ता पर काबिज हैं। वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। 2021 के चुनाव में टीएमसी ने 213 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया था, जबकि भाजपा 77 सीटों पर सिमट गई थी। ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव अपनी सत्ता के बचाव और चौथी बार मुख्यमंत्री बनने की चुनौती है, वहीं भाजपा यहां हर हाल में जीत के लिए बेताब है। कांग्रेस और वाम दलों के लिए यह चुनाव अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई है, क्योंकि उनका वोट शेयर लगातार भाजपा और टीएमसी की ओर खिसक रहा है।
तमिलनाडु की 234 सीटों पर मुकाबला इस बार त्रिकोणीय होने की संभावना है,। एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके ने पिछले चुनाव में 133 सीटें जीती थीं, जबकि एआईएडीएमके (AIADMK) को 66 सीटें मिली थीं। 10 मई 2026 को कार्यकाल समाप्त होने से पहले राज्य में चुनाव होंगे। इस बार रोमांच इसलिए बढ़ गया है क्योंकि तमिल सुपरस्टार थलपति विजय ने अपनी पार्टी ‘तमिलागा वेट्ट्री कजगम’ के साथ मैदान में उतरने का फैसला किया है, जो डीएमके बनाम एआईएडीएमके की पारंपरिक लड़ाई को बदल सकता है। भाजपा भी यहाँ अपना आधार बढ़ाने के लिए एआईएडीएमके से अलग होकर स्वतंत्र रूप से जोर लगा रही है।
केरल विधानसभा (140 सीटें) का कार्यकाल 23 मई 2026 को समाप्त हो रहा है,। यहाँ मुकाबला एलडीएफ (LDF) और यूडीएफ (UDF) के बीच है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन अगर तीसरी बार सत्ता में वापसी करते हैं तो यह एक नया रिकॉर्ड होगा, लेकिन उनकी हार लेफ्ट के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा झटका साबित हो सकती है। कांग्रेस के लिए केरल बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि राहुल गांधी के करीबी केसी वेणुगोपाल और प्रियंका गांधी यहीं से संसदीय राजनीति से जुड़े हैं। 2021 में एलडीएफ ने 99 सीटों के साथ सत्ता बरकरार रखी थी।
असम में 126 सीटों के लिए चुनाव होने हैं, जहां भाजपा 2016 से सत्ता में है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में एनडीए तीसरी बार जीत की जुगत में है। 2021 में एनडीए ने 75 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस नीत गठबंधन को 50 सीटें मिली थीं। यहाँ बदरुद्दीन अजमल का तीसरा मोर्चा भी मुस्लिम राजनीति के लिहाज से अहम भूमिका निभाता है। कांग्रेस के लिए यहाँ अपना ‘सियासी वनवास’ खत्म करने की कड़ी चुनौती है।
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केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी (30 सीटें) में वर्तमान में एआईएनआरसी (AINRC) और भाजपा का गठबंधन सत्ता में है, जिसके मुख्यमंत्री एन. रंगासामी हैं। इसके अलावा, गोवा, कर्नाटक, यूपी और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में होने वाले विधानसभा उपचुनाव और यूपी के पंचायत चुनाव (जिसे 2027 का सेमीफाइनल माना जा रहा है) भी 2026 की राजनीतिक तपिश को बढ़ाएंगे। कुल मिलाकर, 2026 का चुनावी परिणाम यह तय करेगा कि इंडिया ब्लॉक (INDIA Block) अपनी एकजुटता बरकरार रख पाता है या भाजपा का विजयी रथ दक्षिण और पूर्व में अपनी गति बढ़ाता है।