

हिमाचल प्रदेश में मानसून इस बार भारी तबाही लेकर आया है। 20 जून से शुरू हुए बरसात के इस दौर में अब तक राज्य में 75 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 45 लोगों की मौत बारिश से जुड़ी घटनाओं में और 30 की मौत सड़क हादसों, बिजली गिरने व गैस विस्फोट जैसी दुर्घटनाओं में हुई है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 288 लोग घायल हुए हैं और करीब 541 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है।
राज्य के मंडी जिले में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां हाल ही में बादल फटने और अचानक आई बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है। 30 जून की रात को आए इस आपदा के बाद से 14 लोगों की मौत हो चुकी है और 31 लोग अब भी लापता हैं। जिला कलेक्टर अपूर्व देवगन के मुताबिक, सबसे ज्यादा तबाही थुनाग, करसोग और धरमपुर उपखंड में हुई है, जहां दर्जनों मकान, मवेशी और सड़कें बह गई हैं।
मंडी में तबाही के दृश्य, हजारों लोग प्रभावित
डीसी मंडी अपूर्व देवगन ने बताया कि “लोगों के पास अब न तो घर हैं, न बिजली और न ही खाना। संचार नेटवर्क और जलापूर्ति जैसी बुनियादी सेवाएं बुरी तरह ठप हो गई हैं। कई गांवों का संपर्क पूरी तरह कट चुका है और हजारों लोग आश्रय की तलाश में हैं।” इस बीच, राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों को अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।
मध्यप्रदेश भी बारिश से बेहाल, पुल ढहा और जलभराव वहीं मध्यप्रदेश में भी बारिश ने कहर बरपाया है। श्योपुर में भारी जलभराव से स्थानीय लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। नरसिंहपुर में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं और राज्य राजमार्ग-22 पर पुल भी ढह गया है, जिससे यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है। प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिया है और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी और मध्यवर्ती क्षेत्रों में ऐसी मौसमीय घटनाएं जलवायु परिवर्तन की ओर इशारा करती हैं, जिन पर अब गंभीर नीति-निर्माण की आवश्यकता है। इस बीच, मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है और आपात सेवाएं अलर्ट पर हैं।