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क्यों नहीं खाया जाता अगहन मास में जीरा, जानिए पुराण और परंपराओं में इसका रहस्य

Cumin Restriction In Agahan Month : हिंदू पंचांग में अगहन मास (मार्गशीर्ष) का पवित्र माना जाता है। इस महीने में हर व्यक्ति को अपने खान-पान, व्यवहार का ध्यान रखने के साथ जीरा खाना भी वर्जित होता है।

  • Written By: दीपिका पाल
Updated On: Nov 21, 2025 | 09:00 AM

अगहन में जीरा खाना क्यों होता है वर्जित (सौ.सोशल मीडिया)

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Cumin Eating Tips: सर्दी का मौसम चल रहा है। इसके साथ ही हिंदू पंचांग में अगहन मास (मार्गशीर्ष) का पवित्र माना जाता है। यहां पर शास्त्रों में कहा गया है कि, अगहन का महीना भगवान श्रीकृष्ण के लिए प्रिय होता है। इसे लेकर श्रीमद्भगवद्गीता में स्वयं भगवान ने कहा है कि महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूं। इसलिए इस महीने को भक्ति, तप, साधना और सात्त्विक भोजन का समय माना गया है।

भगवान कृष्ण के कथन अनुसार इस महीने में हर व्यक्ति को अपने खान-पान, व्यवहार और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि, इस दौरान जितना व्यक्ति सात्विक रहेगा उतना ही उसकी मन-बुद्धि स्थिर रहती है। भगवान की कृपा भी बनी रहेगी। इसी संदर्भ में एक परंपरा यह भी है कि अगहन मास में जीरा नहीं खाना चाहिए।

जानिए इसका वैज्ञानिक महत्व भी

यहां पर जीरा को सेहत के लिए स्वास्थ्य वर्धक माना गया है। वहीं पर मान्यताओं के अनुसार मानें तो, जीरा तासीर में गर्म होता है इस वजह से यह महीना शीत ऋतु में आता है, इसलिए कहा गया है कि तेज या गरम तासीर वाली चीजों का सेवन शरीर के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ देता है। इसके अलावा धार्मिक दृष्टि के अनुसार ,मार्गशीर्ष मास में मन को शांत, स्थिर और संयमित रहना चाहिए। वहीं पर जीरा इंद्रियों को उत्तेजित करने वाला पदार्थ माना गया है, जिसकी वजह से कहा गया कि व्रत, जप या ध्यान करते समय इसका प्रयोग न करें।

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शास्त्रों में कहा गया है कि, सात्विक भोजन का सेवन ही करना चाहिए। दरअसल जीरे को रजोगुण बढ़ाने वाला तत्व माना गया है। यह ध्यान और एकाग्रता को बाधा में डालने का काम करता है। इसलिए पूजा-पाठ करने वाले कुछ लोग इस मास में किचन से जीरा हटाकर हींग या काली मिर्च का इस्तेमाल करते हैं।

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विष्णु और लक्ष्मी की उपासना का समय

यहां पर लोक परंपराओं में अगहन मास को लेकर बात कही गई है। यहां पर अगहन मास में जीरा खाने से लक्ष्मी-कृपा कम होती है। इसका कारण है कि, यह अगहन का मास विष्णु और लक्ष्मी की उपासना का महीना माना गया है। इसलिए लोग इस अवधि में हर तरह से सात्त्विक और सरल भोजन को ही प्राथमिकता देते हैं। वहीं पर आयुर्वेद के अनुसार बताया गया है कि, इस समय पित्त दोष थोड़ा बढ़ा हुआ रहता है और जीरा पित्त व उष्णता दोनों को बढ़ाने वाला माना जाता है। ऐसे में जीरा खाने से कुछ लोगों को सिरदर्द, जलन या पाचन से जुड़ी दिक्कतें महसूस हो सकती हैं। इसलिए इसे खाने से मना किया गया।

आईएएनएस के अनुसार

Why is cumin not eaten in the month of agahan

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Published On: Nov 21, 2025 | 09:00 AM

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