क्या सीने में होने वाला हर दर्द है हार्ट अटैक? जानें एंजियोग्राफी कैसे बन सकती है आपकी लाइफ सेवर!
Angiography Awareness: सीने में दर्द होने पर अक्सर लोग इसे सीधे हार्ट अटैक से जोड़ लेते हैं जबकि इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। ऐसे में सही समय पर जांच बेहद जरूरी हो जाती है।
- Written By: प्रीति शर्मा
अस्पताल में हार्ट की जांच करता डॉक्टर (सौ. एआई)
Heart Health Tips: हमारा दिल शरीर का वह इंजन है जो बिना रुके खून पंप करता है लेकिन बदलती लाइफस्टाइल में नसों में ब्लॉकेज एक साइलेंट किलर बन गया है। इस खतरे को भांपने के लिए एंजियोग्राफी सबसे भरोसेमंद हथियार है। आइए समझते हैं यह जांच कैसे होती है और क्यों यह जान बचाने के लिए जरूरी है।
दिल की बीमारियों का समय पर पता चलना ही जीवन और मृत्यु के बीच का सबसे बड़ा अंतर पैदा करता है। जब किसी व्यक्ति को सीने में भारीपन, सांस फूलना या लगातार बेचैनी महसूस होती है तो डॉक्टर सबसे पहले एंजियोग्राफी की सलाह देते हैं। कई लोग इस नाम से घबरा जाते हैं लेकिन वास्तव में यह एक सरल और सटीक जांच प्रक्रिया है।
क्या है एंजियोग्राफी
एंजियोग्राफी मूल रूप से नसों और धमनियों का एक विशेष एक्स-रे है। यह टेस्ट डॉक्टर को यह देखने में मदद करता है कि आपके दिल, दिमाग या शरीर के अन्य हिस्सों में खून का बहाव सही है या नहीं। यदि नसों में कहीं भी वसा (Fat) या कैल्शियम जमा होने से ब्लॉकेज पैदा हो रही है तो एंजियोग्राफी उसे साफ-साफ स्क्रीन पर दिखा देती है।
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एंजियोग्राफी बनाम एंजियोप्लास्टी
भ्रम दूर करें अक्सर लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं लेकिन इनमें बड़ा अंतर है। एंजियोग्राफी सिर्फ एक जांच (Diagnosis) है जिससे समस्या का पता लगाया जाता है। वहीं एंजियोप्लास्टी उस समस्या का इलाज है जिसमें ब्लॉकेज को हटाकर वहां स्टेंट (छल्ला) डाला जाता है।
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कैसे होती है यह प्रक्रिया
इस टेस्ट के दौरान मरीज को पूरी तरह बेहोश नहीं किया जाता। डॉक्टर हाथ या पैर की एक नस के जरिए एक बेहद पतली ट्यूब (कैथेटर) अंदर डालते हैं। इसके बाद एक विशेष डाई (रंगीन द्रव्य) नसों में छोड़ा जाता है। जैसे ही यह डाई नसों से गुजरती है एक्स-रे मशीन उसकी तस्वीरें लेती है। इससे डॉक्टर को पता चल जाता है कि ब्लॉकेज कितने प्रतिशत है और कहां स्थित है। यह पूरी प्रक्रिया लगभग 30 से 60 मिनट में पूरी हो जाती है।
टेस्ट के बाद की जरूरी सावधानियां यदि एंजियोग्राफी के बाद ब्लॉकेज निकलता है और इलाज (जैसे स्टेंटिंग) किया जाता है तो रिकवरी के लिए ये बातें महत्वपूर्ण हैं।
वजन न उठाएं: प्रक्रिया के बाद कुछ दिनों तक भारी सामान उठाने से बचें।
धूम्रपान और शराब से तौबा: ये आदतें नसों को दोबारा सिकोड़ सकती हैं।
डाइट में बदलाव: कम नमक, कम चीनी और फाइबर युक्त फलों व सब्जियों का सेवन करें।
दवाइयों में नियमितता: डॉक्टर द्वारा दी गई खून पतला करने वाली दवाइयां कभी न छोड़ें।
एंजियोग्राफी से डरने के बजाय इसे अपनी सुरक्षा का कवच समझें। सही समय पर की गई यह जांच न केवल दिल के बड़े खतरों को टाल सकती है बल्कि आपको एक स्वस्थ और लंबा जीवन भी दे सकती है।
