नेशनल हार्ट ट्रांसप्लांट डे (सौ.सोशल मीडिया)
अंगदान यानि महादान, किसी स्वस्थ व्यक्ति की मौत होेने पर उसके स्वस्थ अंगों को किसी जरूरत मंद को देना या प्रत्यारोपित करना महाना कार्य होता है। आज भारत में हृदय प्रत्यारोपण दिवस (Hearth Transplant Day) मनाया जा रहा है जो देश में दिल को प्रत्यारोपित करने की प्रक्रिया को बढ़ावा देता है। मौजूदा समय में दिल की बीमारियों से पीड़ित कई मरीज है जिन्हें किसी ना किसी स्वास्थ्य स्थिति में दिल की आवश्यकता होती है इसलिए हृदय प्रत्यारोपण की किया जाता है लेकिन इसमें भी दानकर्ता के परिजनों की सहमति जरूरी है।
देश में हार्ट ट्रांसप्लांट की तकनीक पहले इतनी प्रभावी नहीं थी इसके लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था। इसे लेकर लोगों की जरूरतों को देखते हुए मरीज के लिए प्रयास लगातार देश में किए गए लेकिन पहली सफलता 3 अगस्त 1994 को मिली। जहां पर सबसे पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया। इस खास उपलब्धि ने भारत को कई देशों में शामिल कर दिया था जहां पर प्रत्यर्पण भारत के मशहूर हृदय रोग विशेषज्ञ पी वेणुगोपाल (P Venugopal) की अगुआई में भारतीय चिकित्सकों की टीम ने सफलता पूर्वक किया था। उस समय इस प्रतिभावान टीम को सम्मानित किया गया।
इसे लेकर मशहूर हृदय रोग विशेषज्ञ पी वेणुगोपाल (P Venugopal) बताते हैं कि, डॉ वेणुगोपाल के साथ 20 सर्जन की टीम ने काम किया था. कानून बनने के दौरान ही डॉ वेणुगोपाल और एम्स के कार्डियोथोरैकिक एंड वस्कुलर सर्जरी विभाग की टीम इस प्रत्यर्पण की तकनीकों पर काम कर रही थी. इससे पहले कुछ जानवरों पर भी प्रयोग किए जा चुके थे. 3 अगस्त के प्रत्यर्पण में केवल 59 मिनट का ही समय लगा था। इस सफल हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद सरकार ने कानून बनाने का फैसला किया।
प्रत्यारोपण के कानून इस प्रत्यारोपण के करीब एक महीने पहले ही यानि 7 जुलाई 1994 को ही लागू हुआ था बताया जाता है कि, हमारे देश के सर्जन इस कानून का ही इंतजार कर रहे थे और प्रत्यर्पण की तैयारी भी पहले से चल रही थी. इस कानून में मानव अंगों को चिकित्सकीय उद्देश्यों के लिए निकालने, उनके भंडारण और और प्रत्यारोपण के अधिकार और कानूनी सीमाओं से संबंधित प्रावधान हैं।
भारत के अलावा दुनिया में कब हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया इसे दरअसल भारत के प्रत्यारोपण से कई साल पहले पहला सफल हृदय प्रत्यारोपण 3 दिसंबर 1967 को हुआ दक्षिण अफ्रिका में हुआ था. और उसके ढाई महीने बाद ही 17 फरवरी 1968 को भारत में भी पहली बार हृदय हृदय प्रत्यारोपण किया गया था. यह प्रत्यारोपण मुंबई के सर्जन प्रफुल्ल कुमार सेन ने किया था और ऐसा प्रयास करने वाले वे दुनिया के चौथे सर्जन बने थे।
अब देश में विशेषज्ञों की निगरानी में हार्ट ट्रांसप्लांट किए जाते है जो तकनीकों के आने से सफल होते जा रहे है पहले के मुकाबले प्रत्यारोपण हृदय का बढ़ा है।