आपके मसूड़ों के बीच फंसा प्लाक बढ़ा सकता है स्ट्रोक का खतरा, स्टडी में हुआ बड़ा चौंकाने वाला खुलासा
हालिया स्टडी में चौंका देना वाला खुलासा भी हुआ है कि, आप प्लाक को साफ नहीं करते है तो आपको स्ट्रोक का खतरा हो सकता है। कई बार लोग दांत में फंसा प्लाक भी नहीं निकाल पाते है जिससे मुंह की बीमारियां बढ़ने का खतरा होता है।
- Written By: दीपिका पाल
दांतों के लिए फ्लॉसिंग का तरीका है सही (सौ.सोशल मीडिया)
Oral Care Tips: इंसान को अपने शरीर के सभी अंगों की सफाई करते रहना चाहिए इसमें ही मुंह एक ऐसा अंग होता है जिसके द्वारा बीमारियां ज्यादा पनपने का खतरा बढ़ता है। दांतों की सफाई नियमित करनी चाहिए इसके लिए डेंटिस्ट रोजाना दो बार टूथब्रश करने की सलाह देते है। कई बार लोग दांत में फंसा प्लाक भी नहीं निकाल पाते है जिससे मुंह की बीमारियां बढ़ने का खतरा ज्यादा होता है। वहीं पर हालिया स्टडी में चौंका देना वाला खुलासा भी हुआ है कि, आप प्लाक को साफ नहीं करते है तो आपको स्ट्रोक का खतरा हो सकता है।
जानिए क्या कहती है स्टडी
यहां पर यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैरोलिना स्कूल ऑफ मेडिसिन की ओर से एक स्टडी सामने आई है इसके अनुसार, अगर आपके दांतों में प्लाक फंस गया है तो यह बेहद ही नुकसान पहुंचाने का काम करता है। यहां पर यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैरोलिना स्कूल ऑफ मेडिसिन में न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सौविक सेन इन विषय में जानकारी दी है।
इस स्टडी में कहा कि, मुंह की बीमारियों का असर हमारे शरीर के अन्य हिस्सों पर भी पड़ता है यानि आपके मुंह में दांत और मसूड़े स्वस्थ नहीं है तो सूजन का खतरा बढ़ सकता है इतना ही नहीं इसमें धमनियों में रुकावट आ सकती है और खून का थक्का जमने से स्ट्रोक भी पड़ सकता है। कई मामले देखने के लिए मिलते है लेकिन प्रमाण कम ही है।
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दांतों की सफाई के लिए फ्लॉसिंग है सही
यहां पर दांतों की सफाई के लिए फ्लॉसिंग का तरीका सबसे खास होता है जो दांतों की सफाई और प्लाक हटाने की प्रक्रिया होती है। यहां पर दांतों की सफाई के लिए नई स्टडी में बताया गया कि, जो लोग सप्ताह में कम से कम एक बार फ्लॉसिंग कराते हैं, उनमें खून के थक्कों के कारण होने वाले स्ट्रोक का खतरा 22 फीसदी कम हो जाता है।
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इसके अलावा ऐसे लोगों में एट्रियल फाइब्रिलेशन नामक हृदय रोग का खतरा भी 12 फीसदी कम हो जाता है और तो और हार्ट से आने वाले खून के थक्कों के कारण स्ट्रोक में 44 फीसदी की कमी आती है। स्टडी के मुताबिक, दांतों की सड़न, मसू़ड़ों की बीमारी जैसे मुंह की बीमारियों से 2022 में दुनिया के 3.5 अरब लोग प्रभावित थे. अब यह आंकड़ा और भी ज्यादा बढ़ सकता है।
