Measles Symptoms: क्या होता है खसरा? बच्चे ही नहीं, बड़ों को भी होता है खतरा, जानें क्या करें और क्या न करें
Measles Awareness: खसरा एक बेहद संक्रामक वायरल इंफेक्शन है, जो बच्चों व बड़ों को अपनी चपेट में ले सकता है। जानिए खसरे के लक्षण, कारण, क्या करें और किन गलतियों से बचें।
- Written By: रीता राय सागर
खसरा (फोटो.सोशल मीडिया)
How To Prevent Measles: खसरा एक ऐसा इंफेक्शन है, जो हवा के माध्यम से फैलता है और बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। यह वैश्विक स्तर पर समस्या बनी हुई है। खसरा से निपटने के लिए शीघ्र निदान, तुरंत उपचार और ठोस रोकथाम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
कैसे फैलता है खसरा
खसरा का वायरस बेहद संक्रामक होता है। यह इंफेक्शन खांसने या छींकने पर फैलता है, जिससे हवा में छोटी-छोटी बूंदें फैल जाती हैं। आमतौर पर, संक्रमण के एक या दो सप्ताह बाद लक्षण दिखाई देने लगते हैं। सबसे पहले, तेज बुखार आता है और फिर सांस लेने में तकलीफ और स्किन में एक निश्चित क्रम में बदलाव आने लगते हैं। इसमें पहले बुखार, श्वसन संबंधी लक्षण और कंजंक्टिवाइटिस, जिसके बाद चेहरे व पूरे शरीर पर दाने निकलने लगते हैं।
खसरा के कारण
- संक्रमण खांसने या छींकने के बाद बूंदों के माध्यम से, नाक या गले के स्राव के सीधे संपर्क से और दुर्लभ मामलों में, दूषित वस्तुओं के माध्यम से भी फैलता है।
- जिन छोटे बच्चों का टीकाकरण नहीं हुआ है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है और जिन यात्रियों को टीकाकरण की अनुमति नहीं है, वे सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं।
- स्थानिक और आयात-संबंधी दोनों ही मामलों में दो खुराक वाले टीकाकरण की कमी एक प्रमुख कारण है।
- जिन समुदायों में टीकाकरण की दर कम होती है, वहां अक्सर बीमारियां फैलती हैं।
- स्वास्थ्य सेवा तक खराब पहुंच और क्षेत्रीय टीकाकरण दरों में गिरावट शामिल हैं।
खसरा के लक्षण
आमतौर पर खसरा में संक्रमण के लक्षण 7 से 14 दिन बाद दिखाई देते हैं और एक निश्चित क्रम में विकसित होते हैं। खसरा तेज बुखार से शुरू होता है, जो अक्सर 104°F से अधिक होता है और इसमें खांसी, नाक बहना और लाल पानी वाली आंखों जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इसके बाद विशिष्ट कोप्लिक स्पॉट्स दिखाई देते हैं और बाद में त्वचा पर दाने फैल जाते हैं।
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प्रारंभिक चरण
तेज बुखार, खांसी, नाक बहना और कंजंक्टिवाइटिस।
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कोप्लिक स्पॉट्स
लक्षण शुरू होने के दो से तीन दिन बाद मुंह के अंदर छोटे सफेद धब्बे दिखाई देते हैं।
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दाने दिखाई देना
3-5 दिन बाद लाल, धब्बेदार दाने निकलते हैं, जो बालों की जड़ों व चेहरे से शुरू होकर धड़ और हाथ-पैरों तक नीचे की ओर फैलते हैं। दानों के साथ बुखार भी बढ़ता है। इसके साथ पूरे शरीर में दर्द भी हो सकता है।
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भूख न लगना
कुछ रोगियों को भूख न लगना, कमजोरी या सूजी हुई लसीका ग्रंथियों का अनुभव हो सकता है। चकत्ते निकलने के बाद, इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है, जिससे अन्य संक्रमण का खतरा और अधिक बढ़ जाता है।
खसरे में क्या करें
- पर्याप्त तरल पदार्थ पिएं जैसे पानी, नारियल पानी, नींबू पानी, सूप और ओआरएस, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।
- नरम और सुपाच्य भोजन करें, जैसे दलिया, खिचड़ी, दाल, दही, सूप और अच्छी तरह पकी हुई सब्जियां।
- विटामिन A और विटामिन C से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे गाजर, पालक, शकरकंद, संतरा, मौसंबी और पपीता आहार में शामिल करें।
- भरपूर आराम करें और शरीर को संक्रमण से लड़ने का समय दें।
- बुखार और अन्य लक्षणों के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लें। बच्चों में जरूरत पड़ने पर डॉक्टर विटामिन A सप्लीमेंट भी दे सकते हैं।
- कमरे को साफ और हवादार रखें तथा मरीज को पर्याप्त आराम करने दें।
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खसरे में क्या न करें
- तला-भुना, मसालेदार और प्रोसेस्ड फूड खाने से बचें, क्योंकि इससे पाचन संबंधी परेशानी बढ़ सकती है।
- कोल्ड ड्रिंक, ज्यादा मीठे पेय और कैफीनेटेड ड्रिंक्स का सेवन न करें।
- डिहाइड्रेशन को नजरअंदाज न करें। उल्टी, दस्त या तेज बुखार होने पर तुरंत तरल पदार्थ का सेवन बढ़ा देना चाहिए और जरूरत पड़े तो डॉक्टर से संपर्क करें।
- बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं न लें। खसरा एक वायरल संक्रमण है और एंटीबायोटिक केवल बैक्टीरियल संक्रमण होने पर ही दी जाती हैं।
- बीमार व्यक्ति को भीड़ या अन्य लोगों के संपर्क में न आने दें, क्योंकि खसरा बेहद संक्रामक रोग है।
- बच्चों को एस्पिरिन न दें, क्योंकि इससे गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं।
