7 नवंबर को हर साल मनाते हैं शिशु सुरक्षा दिवस, जानें मां का दूध बच्चे के लिए कितना है जरूरी
शिशु की सुरक्षा और देखभाल माता की जिम्मेदारी होती है इसे ही बताने के लिए हर साल इन्फेंट प्रोटेक्शन डे यानी शिशु सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य शिशु की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है यहां पर नवजात शिशु के लिए सुरक्षा का कवच माता का दूध होता है।
- Written By: दीपिका पाल
शिशु सुरक्षा दिवस (सौ.सोशल मीडिया)
Infant Protection Day 2024: मां और बच्चे का संबंध बेहद खास होता है इसकी मिसाल तो समस्त सृष्टि जानती है। शिशु की सुरक्षा और देखभाल माता की जिम्मेदारी होती है इसे ही बताने के लिए हर साल इन्फेंट प्रोटेक्शन डे यानी शिशु सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य शिशु की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है यहां पर नवजात शिशु के लिए सुरक्षा का कवच माता का दूध होता है। इस दूध में फैट, शुगर, पानी और प्रोटीन की सही मात्रा होती है जो शिशु को सेहतमंद मनाती है।
क्यों मनाते हैं शिशु सुरक्षा दिवस
यहां पर शिशु सुरक्षा दिवस को लेकर बात करें तो, नवजात शिशु बीमारियों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं, इसलिए इन देशों और अमेरिका ने 7 नवंबर को शिशु सुरक्षा दिवस के रूप में घोषित किया। इस दिन को खास तौर पर बाल संरक्षण और कल्याण के उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय पहलों द्वारा चिह्नित किया गया था। इसके अलावा विभिन्न राष्ट्रीय और वैश्विक संगठन जागरूकता अभियान चलाने के लिए मिलकर काम करते हैं जो बाल शोषण जैसे मुद्दों को संबोधित करते हैं और शिशुओं के लिए रहने की स्थिति को बेहतर बनाते हैं। वे बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेवा तक समान पहुँच सुनिश्चित करते हैं।
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नवजात के लिए अमृत है मां का दूध
यहां पर नवजात बच्चे की सुरक्षा के लिए मां का दूध सबसे खास अमृत के समान होता है। इसके लिए स्तनपान को एक नेचुरल प्रक्रिया होती है जिसमें बच्चा जैसे ही पैदा होता है, मां के ब्रेस्ट में दूध बनना शुरू हो जाता है और कई महीनों तक बच्चे का यही फूड होता है।बच्चे को सही तरह से फीड करवाने के लिए जरूरी है कि मां को ब्रेस्टफीडिंग का सही तरीका पता हो। दरअसल, सही पॉजिशन को जानकर ही बच्चे को सही तरीके से फीडिंग करवाई जा सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि, बच्चे को हर 2 से 3 घंटे पर दूध पिलाती रहें। अगर बच्चा दिनभर में 6 से 8 बार यूरिन कर रहा है, तो समझ लीजिए कि उसकी डायट सही है। हां, जब वह 4 से 6 महीने का हो जाए, तो उसे सॉलिड फूड देना शुरू कर दें।
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स्तनपान से कम होती है मृत्यु दर
यहां पर मिली रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे के जन्म के तुरंत बाद या कुछ ही घंटों के भीतर अगर बच्चे को स्तनपान कराया जाता है तो, इससे ‘शिशु मृत्यु दर’ काफी कम हो सकती है। हालांकि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की साल 2017 की रिपोर्ट में पता चला है कि जन्म के 1 घंटे के अंदर मात्र 44 फीसदी बच्चों को ही मां का पहला दूध मिल पाता है।
