क्या आपके पैरों में बनी रहती हैं बर्फ वाली ठंडक, इन बीमारियों का होता है इशारा

ठंड में ऐसी स्थिति सामान्य होती है कि लेकिन गर्मी में या किसी और मौसम में भी आपके पैरों में ठंडक रहें तो नुकसान पहुंचता है। इस तरह से पैरों का ठंडा रहना कई बड़ी बीमारियों के होने की और इशारा करती है।
आखिर पैरों में क्यों होती है बर्फ वाली ठंडक
बर्फ वाली ठंडक (सौ. सोशल मीडिया)
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Cold Feet Symptoms: किसी बीमारी के लक्षण अक्सर बीमारी के ज्यादा बढ़ने के बाद ही नजर आते है। कई लोगों को पैरों में ठंड की शिकायत होती है। यहां पर कई लोगों को लगता है पैरों को बर्फ में रख लिया है या इस तरह ही काफी ठंडक पैरों में होती है। ठंड के मौसम में ऐसी स्थिति सामान्य होती है कि लेकिन गर्मी के मौसम या किसी और मौसम में भी आपके पैरों में ठंडक रहें तो नुकसान पहुंचता है। इस तरह से पैरों का ठंडा रहना कई बड़ी बीमारियों के होने की और इशारा करती है। चलिए जानते हैं इन बीमारियों और उसके बचाव के उपाय।

इन बीमारियों की ओर करती है इशारा

आपको  बताते चलें, पैरों में ठंडक होने से कई बीमारियों की ओर इशारा करते है चलिए जानते हैं इनके बारे में...

  • पैरों का लगातार ठंडा रहना

अगर आपके पैरों में लगातार ठंड की शिकायत रहती है तो इसका कारण ब्लड सर्कुलेशन होता है। यानि ऐसी स्थिति में पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता है इसलिए ठंडे पैर रहते है। यहां पर आमतौर पर हृदय से जुड़ी बीमारियों, उच्च कोलेस्ट्रॉल या धमनियों में ब्लॉकेज के कारण पैरों में ठंड की शिकायत बन जाती है। इसके कई लक्षण होते है जो सामान्य तरीके से नजर आ जाते है। इन लक्षणों में पैरों में झनझनाहट, पैरों का सुन्न पड़ जाना, चलने में थकान या दर्द की शिकायत होती है।

  • पेरीफेरल न्यूरोपैथी

यहां पर पैरों में ठंड की शिकायत होने का कारण डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी की ओर इशारा हो सकता है। इस स्थिति में  पैरों की नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और पैरों में ठंडक, जलन या सुन्नता महसूस होती है। इसके अलावा लक्षण की बात करें तो, पैरों में चुभन जैसा अहसास, हल्का दर्द या जलन संतुलन में परेशानी आदि हो सकती है। बारिश में मौसमी बीमारियों का होता है खतरा, बचाव के लिए पिएं औषधीय गुण की ड्रिंक

  • रेनॉड सिंड्रोम

पैरों में बर्फ जैसी ठंडक का कारण रेनॉड सिंड्रोम हो सकता है। इस बीमारी की स्थिति को ऑटोइम्यून डिसऑर्डर कहा जाता है। इस बीमारी की स्थिति में ठंड या तनाव के समय उंगलियों और पैरों की रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं. इससे पैर बर्फ जैसे ठंडे हो जाते हैं। इस बीमारी की स्थिति में पैर का रंग नीला या पीला पड़ना, झुनझुनी या सुन्नता, ठंड लगने पर तेज असर हो जाता है।

  • हाइपोथायरॉइडिज्म

अगर आपके पैर सामान्य रहने की बजाय ठंडे रहते है तो इस स्थिति को हाइपोथायरॉइडिज्म की स्थिति भी कह सकते है। शरीर का तापमान नियंत्रण प्रभावित होता है. इससे हाथ और पैर ठंडे रहने लगते हैं। इसके लक्षण बार-बार ठंड लगना, थकान, वजन बढ़ना बाल झड़ना, ड्राई स्किन जैसी स्थिति हो सकती है।

  • बचाव जरूरी

आपको बताते चलें कि, इस बीमारी से बचने के लिए आपको बचाव भी रखना चाहिए। यहां पर ठंडे पैर की वजह से शरीर के अंदर चल रही किसी गंभीर गड़बड़ी का संकेत हो सकते हैं. अगर यह समस्या अक्सर बनी रहती है। कोई बड़ी बीमारी घेर ना लें इसके लिए आप बचाव के तरीके अपना सकते है। यहां पर डॉक्टर के इलाज के बाद समय रहते सही जांच और इलाज से आप न सिर्फ अपने पैरों को गर्म रख सकते हैं, बल्कि किसी बड़ी बीमारी से भी बच सकते हैं।

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