बाल और नाखून काटने की आदत सेहत के लिए होती है फायदेमंद, आयुर्वेद में जानिए इसके बारे में

Benefits of Healthy Habits: आयुर्वेद में अच्छी आदतों, बाल और नाखून काटने को सेहत के लिए फायदेमंद बताया है।दैनिक जीवन की छोटी-छोटी आदतें शरीर और मन दोनों पर गहरा प्रभाव डालती हैं।
बाल और नाखून काटने की आदत
बाल और नाखून काटने की आदत (सौ. सोशल मीडिया)
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Healthy Habits Tips: सेहत के लिए खानपान या व्यायाम ही जरूरी नहीं होता है। आवश्यक होती है समय-समय पर बाल और नाखून काटने की अच्छी आदत भी। कई लोग इन आदतों को साफ-सफाई के नजरिए से देखते होंगे लेकिन आपको जानकारी ना हो। आयुर्वेद में अच्छी आदतों, बाल और नाखून काटने को सेहत के लिए फायदेमंद बताया है।दैनिक जीवन की छोटी-छोटी आदतें शरीर और मन दोनों पर गहरा प्रभाव डालती हैं। इन्हीं में से एक आदत है, समय-समय पर बाल और नाखून काटना। चलिए जानते है...

स्वच्छता को माना 'आचार' का हिस्सा

जैसा कि, आयुर्वेद में स्वच्छता को सामान्य आचार यानि व्यवहार के रूप में रखा गया है। लंबे नाखून और बिना संवारे बालों में धूल, गंदगी और पसीना आसानी से जमा हो जाता है। इनकी वजह से बैक्टीरिया और फंगस पनपते है। सफाई नहीं होने से संक्रमण तो बढ़ता है स्किन से जुड़ी समस्याएं भी हो जाती है। अगर आप नाखूनों की सफाई नहीं करते है तो, नाखूनों के किनारों पर नजर नहीं आने वाले कीड़े पनपते है। नियमित रूप से बाल और नाखून काटने से इन जीवाणुओं का जमाव रुकता है और शरीर शुद्ध व स्वस्थ बना रहता है।

आयुर्वेद में इसके फायदे जानिए

आयुर्वेद में बाल और नाखून काटने की आदत किस तरह से फायदेमंद है इसके बारे में बताया गया है।

1-यहां पर आयुर्वेद में इन अच्छी आदतों से जुड़े फायदे की बात करें तो, नाखून छोटे और स्वच्छ रखने से संक्रमण की संभावना काफी कम हो जाती है। इसी प्रकार मूंछों की नियमित देखभाल न केवल चेहरे की सुंदरता बढ़ाती है, बल्कि होंठ और नाक के आसपास स्वच्छता भी बनाए रखती है।

2- आयुर्वेद ने माना है कि, मन और शरीर का आपस में संतुलन होना जरूरी होता है। यह मेल सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। स्वच्छ और संतुलित रूप-रंग व्यक्ति को आत्मविश्वास देता है और सामाजिक जीवन को भी सकारात्मक बनाता है। मूंछें भारतीय संस्कृति में शौर्य और सम्मान का प्रतीक रही हैं, लेकिन इनकी नियमित देखभाल करना भी उतना ही आवश्यक है। बिना संवारे बाल या नाखून जहां शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं, वहीं यह सामाजिक दृष्टि से भी अस्वच्छता का संकेत माने जाते हैं।

दीर्घायु होने का होता है आधार

यहां पर बताया गया कि, बाल और नाखून काटने से मतलब केवल सुंदर दिखने के अंतर्गत नहीं आता है। बताया जाता है कि, यह शरीर की स्वच्छता, स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन बनाए रखने का एक अनिवार्य नियम है। आयुर्वेद में यह भी बताया है कि, जब व्यक्ति शरीर को साफ रखने का तरीका अपनाता है है तो उसकी आभा और एनर्जी दोनों बढ़ जाती है। इस तरह की आभा जीवनशक्ति (ओजस) को मजबूत करती है और दीर्घायु का आधार बनती है। इस तरह से सेहत के लिए आपको नाखून और बालों को काटने की आदत रखनी चाहिए। यह फायदा दिलाती है आपको नुकसान नहीं।

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