अब आंखों की तस्वीर से लगेगा बड़ी से बड़ी बीमारी का पता, दिल्ली एम्स ने ईजाद किया ऐसा सॉफ्टवेयर
आंखों में बढ़ती समस्या और आंखों की रोशनी कम होने के मामले के बीच बड़ी खुशखबरी सामने आई है। यहां पर एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है जिससे अब आंखों के जरिए बीमारी का पता लग पाएगा और वह भी काफी आसानी से।
- Written By: दीपिका पाल
आंखों की हर बीमारी का चलेगा अब पता (सौ.सोशल मीडिया)
Eye Test: स्वस्थ रहने के लिए हमारे शरीर के सभी अंगों का स्वस्थ रहना काफी जरूरी होता है। आंखें, शरीर के सबसे नाजुक अंग में से एक होती है जिनका ख्याल रखना हर किसी के लिए जरूरी होता है। आंखों में बढ़ती समस्या और आंखों की रोशनी कम होने के मामले के बीच बड़ी खुशखबरी सामने आई है। यहां पर एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है जिससे अब आंखों के जरिए बीमारी का पता लग पाएगा और वह भी काफी आसानी से।
एआई की मदद से तैयार हो रहा है सॉफ्टवेयर
आपको बताते चलें कि, दिल्ली एम्स और केंद्र सरकार मिलकर एआई (Artificial Intelligence) के जरिए एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार कर रही है। इसके जरिए अब फोटो देखकर आंखों की बीमारी का पता लग पाएगा। इस ऐप या सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके ग्लूकोमा और काला मोतिया की बीमारी का पता लगाया जाता है। इस खास तरह के सॉफ्टवेयर को फिलहाल तैयार किया गया है जो अपने ट्रायल फेज में है। जल्द ही 6 महीने के अंदर इस ऐप को लॉन्च करने की तैयारी है। इस खास सॉफ्टवेयर के जरिए किसी नेत्र विशेषज्ञों की आवश्यकता नहीं होगी। बल्कि मेडिकल स्टाफ ही इसका इस्तेमाल कर पाएगा।
जानिए कैसे काम कर पाएगा सॉफ्टवेयर
इस खास तरह के सॉफ्टवेयर को लेकर एम्स के नेत्र रोग विभाग के डॉक्टरों ने बताया कि, इस खास तरह के सॉफ्टवेयर को तैयार करने के दौरान ग्लूकोमा, काला मोतिया, डायबिटिक रेटिनोपैथी की वजह से आंखों के रेटिना में बीमारी से संबंधित लाखों फोटो को अपलोड किया जाएगा। इन बीमारी के लक्षण का ब्योरा भी इसमें प्रोग्राम किया जाएगा। जैसे ही किसी भी लक्षण को यह सॉफ्टवेयर पकड़ेगा। तुरंत उससे संबंधित पूर्व से डाली गई जानकारियों से मिलान किया जाएगा। यहां पर इन बीमारियों का निष्कर्ष निकाल कर बता देगा।
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कैसा होगा इलाज
यहां पर आंखों की बीमारी का पता लगाने के लिए इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें विशेष कैमरों का इस्तेमाल करते है इसके लिए नेत्र रोग विशेषज्ञ की आवश्यकता होती है और प्राइवेट कंपनी की रकम का भुगतान करना होता है। सॉफ्टवेयर तैयार हो जाने के बाद इसमें जांच को निशुल्क कराया जाएगा। बड़े अस्पतालों से लेकर सरकारी अस्पताओं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाएं शुरू की जाएगी।
