शांत वातावरण में ध्यान करती महिला (सौ. एआई)
Mental Health Tips: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी भरी में शांति एक बहुत ही दुर्लभ और जरूरी चीज हो गई है। अशांति और शोर शराबा से न सिर्फ शरीर को बीमार करता है बल्कि यह तनाव, चिड़चिड़ापन, मानसिक तनाव भी पैदा करता है। ऐसे में मौन रहना एक सेल्फ अवेयरनेस के रुप में काम करता है। यह मानसिक स्पष्टता और गहरी आंतरिक शांति देता है।
शोर-शराबे के बीच मानसिक शांति अब एक विलासिता बन गई है। बता दें 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर सनातन परंपरा का मौन व्रत न केवल आध्यात्मिक शुद्धि का मार्ग है बल्कि आधुनिक विज्ञान भी इसे तनाव और ब्रेन सेल्स को री-बूट करने का सबसे प्रभावी तरीका माना गया है।
हिंदू धर्म में मौन को सर्वोत्तम तप की संज्ञा दी गई है। मौनी अमावस्या के दिन इस व्रत का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। गीता में भी मौन को मानसिक तप कहा गया है जो वाणी के संयम से शरीर के ओजस की रक्षा करता है। यह आध्यात्मिक ऊर्जा को बचाकर व्यक्ति को मानसिक रूप से फौलादी बनाता है।
आयुर्वेद के अनुसार ज्यादा बोलना शरीर में वात दोष को बढ़ाता है। जब वात असंतुलित होता है तो नींद की कमी, एंग्जायटी और एकाग्रता में कमी आने लगती है। मौन रहने से शरीर में सत्व गुण की वृद्धि होती है। इससे न केवल ऊर्जा का संरक्षण होता है बल्कि ब्लड प्रेशर और हृदय स्वास्थ्य में भी सुधार देखने को मिलता है। यह क्रोध पर नियंत्रण पाने का सबसे सरल और प्राकृतिक तरीका है।
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भगवद्गीता में भी मौन को गुह्य ज्ञान कहा गया है जिसके अनुसार मौन व्रत मानसिक तप का रूप है जो शरीर-मन के संतुलन के लिए लाभकारी है। यह वाणी, संयम से ओजस की रक्षा करता है और सेहत को मजबूत बनाता है।
हालिया रिसर्च के अनुसार मौन रहने का दिमाग पर हीलिंग इफेक्ट होता है। एक महत्वपूर्ण अध्ययन में पाया गया कि रोजाना केवल 2 घंटे शांत रहने से मस्तिष्क की नई कोशिकाएं विकसित होती हैं। यह प्रक्रिया याददाश्त बढ़ाने, भावनाओं को नियंत्रित करने और सीखने की क्षमता में सकारात्मक बदलाव लाती है।
मौन व्रत से तनाव हार्मोन यानी कोर्टिसोल को कम करता है। यह ब्लड प्रेशर और हृदय गति को नियंत्रित करता है जिससे नींद की गुणवत्ता में भी सुधार आता है। इससे एकाग्रता बढ़ती है और क्रिएटिविटी आती है। यह मेडिटेशन जैसे प्रभाव देता है जो ब्रेन के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।