Women Health Tips: महिलाओं में बार-बार क्यों होता है UTI? बिना देर किए अपनाएं ये घरेलू नुस्खे
UTI Problem in Women: महिलाओं में यूटीआई की समस्या आम होती जा रही है, जिसका कारण कमजोर इम्युनिटी, पानी की कमी और कुछ गलत आदतें हो सकती हैं। बार-बार होने वाला यूटीआई काफी तकलीफदेह होता है।
- Written By: प्रीति शर्मा
यूटीआई से परेशान महिला (सौ. फ्रीपिक)
UTI Home Remedies: महिलाओं में अक्सर यूटीआई की समस्या देखी जाती है जिसके पीछे कई कारण हैं। मेडिकल की भाषा में इसे साइलेंट एपिडेमिक कहा जाता है। आज महिलाओं के लिए यह एक गंभीर समस्या बन गया है। आंकड़ों के अनुसार लगभग 25 प्रतिशत महिलाएं इस संक्रमण की बार-बार शिकार होती हैं। अगर आप इस जलन और दर्द को नजरअंदाज करती हैं तो संक्रमण पेशाब की थैली से होता हुआ सीधे किडनी तक पहुंच सकता है।
क्यों है साइलेंट किलर
इसकी वजह सिर्फ बैक्टीरिया नहीं हैं बल्कि महिलाओं के शरीर की बनावट और जीवनशैली भी बड़ी भूमिका निभाती है। महिलाओं में मूत्रमार्ग पुरुषों की तुलना में छोटा होता है इसलिए बैक्टीरिया को पेशाब की थैली (ब्लैडर) तक पहुंचने में ज्यादा दूरी तय नहीं करनी पड़ती।
इसके अलावा मूत्रमार्ग का गुदा के पास होना भी संक्रमण को आसान बना देता है। मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन कम होने से वजाइना के सुरक्षात्मक बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है। साथ ही, पानी कम पीना, पेशाब देर तक रोकना, सार्वजनिक शौचालयों का इस्तेमाल और माहवारी के दौरान स्वच्छता का ध्यान न रखना भी इस समस्या को आम बनाते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर (सौ. फ्रीपिक)
आयुर्वेद में यूटीआई को केवल बैक्टीरिया का हमला नहीं माना जाता बल्कि इसे मूत्रकृच्छ्र या मूत्राघात कहा गया है और इसे शरीर के पित्त दोष के असंतुलन से जोड़ा गया है। अत्यधिक गर्म, तीखे, नमकीन या खट्टे भोजन और अपच या अजीर्ण की स्थिति पित्त को बढ़ा देती है जिससे मूत्रकृच्छ्र या मूत्राघात, बार-बार पेशाब, पेट या कमर में दर्द जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
इन आयुर्वेदिक उपायों से मिलेगी राहत
आयुर्वेद में इसका स्थायी और सुरक्षित समाधान बताया गया है। चंद्रप्रभा वटी मूत्राशय की मांसपेशियों को मजबूत करती है और जलन को कम करती है। गोक्षुरादि गुग्गुल पेशाब की मात्रा बढ़ाकर बैक्टीरिया को बाहर निकालता है। नीरी तुरंत राहत देती है और संक्रमण को किडनी तक पहुंचने से रोकती है।
इसके अलावा चन्दनासव शरीर की गर्मी शांत करता है और पेशाब में जलन को जड़ से खत्म करता है। जड़ी-बूटियां जैसे पुनर्नवा, वरुण और गिलोय भी शरीर की सुरक्षा बढ़ाती हैं।
आयुर्वेद में तुरंत राहत के लिए सुबह धनिया और मिश्री का पानी पीने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा सार्वजनिक शौचालयों का इस्तेमाल करते समय सावधानी बर्तें। रोजाना पर्याप्त पानी पिएं और पेशाब को न रोकें। इस तरह देखभाल करने से महिलाएं में यूटीआई की समस्या कम हो सकती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दिए गए सुझाव केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें। नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।
