संतुलित भोजन से भरी थाली (सौ. एआई)
Balanced Diet Tips: आधुनिक जीवनशैली में हम अक्सर भागते-दौड़ते या मोबाइल देखते हुए भोजन करते हैं। लेकिन आयुर्वेद इसे सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है। आयुर्वेद के अनुसार भोजन का सीधा संबंध हमारे तन और मन दोनों से है। अगर हम अपनी थाली से जुड़े इन 9 अहम नियमों का पालन करें तो आधी से ज्यादा बीमारियां बिना दवा के ठीक हो सकती हैं।
बिना भूख के भोजन करना पाचन तंत्र पर बोझ डालने जैसा है। जब शरीर को सच में भूख लगती है तभी पाचन अग्नि सक्रिय होती है। इसके अलावा वही भोजन करें जो आपके शरीर को ऊर्जा दे न कि सुस्ती।
अगर आप गुस्से, तनाव या चिंता में हैं तो भोजन करने से बचें। ऐसी स्थिति में खाया गया खाना ठीक से नहीं पचता और एसिडिटी या गैस का कारण बनता है। हमेशा शांत और खुश होकर भोजन करें।
कोशिश करें कि भोजन बनने के एक घंटे के भीतर ही उसे ग्रहण कर लें। बार-बार गर्म किया गया या बासी खाना अपने पोषक तत्व खो देता है और पचने में भारी हो जाता है।
भोजन को चबा-चबाकर और उसका पूरा स्वाद लेकर खाएं। जब आप खाने का आनंद लेते हैं तो मस्तिष्क तृप्ति का संकेत देता है जिससे ओवरईटिंग (ज्यादा खाना) की समस्या नहीं होती।
यह भी पढ़ें:- सावधान! ज्यादा पीले और चमकदार भुट्टे बढ़ा सकते हैं आपकी परेशानी; खरीदने से पहले ऐसे करें चेक
रात का खाना हमेशा हल्का होना चाहिए और सोने से कम से कम 3 घंटे पहले खा लेना चाहिए। खाने के बाद 100 कदम टहलना पाचन के लिए जादुई काम करता है।
सर्दियों में गर्म और पौष्टिक जबकि गर्मियों में हल्का और ठंडा भोजन करें। स्थान और जलवायु के अनुसार भोजन का चुनाव शरीर को संतुलित रखता है।
लगातार कुछ न कुछ खाते रहने से पाचन तंत्र को आराम नहीं मिलता। दो भोजन के बीच पर्याप्त अंतर होना जरूरी है ताकि पिछला भोजन पूरी तरह पच सके।
भोजन से ठीक पहले या तुरंत बाद ज्यादा पानी पीना जहर समान माना गया है। यह पाचन अग्नि को शांत कर देता है। प्यास लगने पर भोजन के बीच में घूंट-घूंट करके थोड़ा पानी पिया जा सकता है।
दही को कभी भी रात के समय नहीं खाना चाहिए। यह कफ दोष को बढ़ाता है। इसी तरह मोटापे या मधुमेह के रोगियों को जौ जैसे मोटे अनाज को प्राथमिकता देनी चाहिए।
आयुर्वेद के ये नियम अनुशासन नहीं बल्कि जीवन जीने की कला हैं। इन्हें अपनाकर आप न केवल शारीरिक रूप से मजबूत बनेंगे बल्कि मानसिक रूप से भी अधिक सक्रिय महसूस करेंगे।