हरियाणा IDFC बैंक घोटाला: ₹590 करोड़ की लूट का मास्टरमाइंड मैनेजर गिरफ्तार, क्या अब नपेंगे बड़े सरकारी अफसर?
IDFC Bank Scam: हरियाणा के ₹590 करोड़ के बैंक घोटाले में ACB ने पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि समेत 5 को गिरफ्तार किया है। फर्जी कंपनियों के जरिए सरकारी धन निकालने की बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
प्रतीकात्मक फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
590 Crore IDFC Bank Fraud: हरियाणा में सरकारी खजाने में सेंध लगाने वाले IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई की है। मास्टरमाइंड पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि सहित पांच आरोपियों की गिरफ्तारी ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि इसमें कई बड़े अफसरों की भूमिका भी अब संदेह के घेरे में है।
हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो ने मंगलवार देर रात एक बड़ी कार्रवाई करते हुए IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले के मुख्य सूत्रधार रिभव ऋषि और उसके चार अन्य साथियों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों में रिभव ऋषि, अभिषेक सिंगला, अभय और स्वाति शामिल हैं, जबकि एक अन्य आरोपी की पहचान उजागर होना अभी बाकी है। ACB की इस छापेमारी के बाद अब जांच की आंच उन सरकारी दफ्तरों तक पहुँचने वाली है, जिनके खातों से करोड़ों की रकम पार की गई थी।
कौन है मास्टरमाइंड रिभव ऋषि और क्या थी उसकी प्लानिंग?
पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि मास्टरमाइंड रिभव ऋषि पहले IDFC फर्स्ट बैंक में ही मैनेजर के पद पर तैनात था। वर्तमान में वह चंडीगढ़ के पास जीरकपुर में AU स्मॉल बैंक में मैनेजर के रूप में कार्यरत था। रिभव ने अपने पद और बैंकिंग सिस्टम की जानकारी का दुरुपयोग करते हुए फर्जी कंपनियां बनाईं। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के खातों से ₹590 करोड़ की भारी-भरकम राशि निकाल ली। यह पूरी साजिश सरकारी पैसे के गबन के लिए बड़ी ही शातिर तरीके से रची गई थी।
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आईएएस अफसरों पर गहराता संदेह: चंडीगढ़ का कनेक्शन
इस घोटाले की परतें खुलने के साथ ही बड़े नौकरशाहों पर भी सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, कई IAS अफसरों की भूमिका संदेह के घेरे में है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इन 18 सरकारी विभागों का मुख्यालय पंचकूला में है, तो आखिर इन अफसरों ने चंडीगढ़ के बैंकों में खाते खुलवाने में इतनी दिलचस्पी क्यों दिखाई? क्या इन खातों को खोलने के पीछे किसी प्रकार का निजी लाभ शामिल था? सरकार को इस वित्तीय गड़बड़ी की भनक पिछले साल जुलाई में ही लग गई थी, जिसके बाद वित्त विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (ACS) ने सभी विभागों को पत्र लिखकर सतर्क रहने को कहा था।
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मुख्यमंत्री का दावा और आगामी कार्रवाई
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने इस मामले पर विधानसभा में जवाब देते हुए बताया कि IDFC फर्स्ट बैंक से ब्याज समेत पूरी राशि की रिकवरी कर ली गई है। हालांकि, रिकवरी के बावजूद सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया की अब एक हाई-लेवल जांच बैठाई गई है। ACB अब इस बात की जांच कर रही है कि गिरफ्तार आरोपियों में बैंक के कितने वर्तमान कर्मचारी शामिल हैं और बाहरी लोगों का नेटवर्क कितना बड़ा है।
