पंजाब में एक होंगे अकाली दल के दोनों गुट! अदालत में हुआ 3 दिग्गजों का सियासी मिलाप, BJP की क्यों बढ़ गई टेंशन?

Punjab News: पंजाब में बागी गुट के वरिष्ठ नेता प्रेम सिंह चंदूमाजरा और सुरजीत सिंह रखड़ा की मुलाकात अकाली दल के दिग्गज बिक्रम सिंह मजीठिया से हुई। जिसके बाद सूबे का सियासी माहौल बदल गया है।
akali dal reunification in punjab court meeting of three big leaders raises bjp tension
बिक्रम सिंह मजीठिया (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Punjab Politics: पंजाब के सियासी गलियारों में अब शिरोमणि अकाली दल के दोनों गुटों के फिर से एक होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। यह कयास तब लगने शुरू हुए जब बागी गुट के वरिष्ठ नेता प्रेम सिंह चंदूमाजरा और सुरजीत सिंह रखड़ा की मुलाकात अकाली दल के दिग्गज बिक्रम सिंह मजीठिया से हुई। चंडीगढ़ अदालत में इन नेताओं के बीच दिखी आपसी गर्मजोशी ने राजनीतिक पंडितों को नए समीकरणों पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।

दरअसल, ये तीनों प्रमुख नेता आज चंडीगढ़ जिला अदालत में एक पुराने मामले की सुनवाई के सिलसिले में पेश होने पहुंचे थे। यह मामला साल 2021 से जुड़ा है, जब अकाली दल ने पंजाब के मुख्यमंत्री के आवास के नजदीक जोरदार प्रदर्शन किया था। इसी विरोध प्रदर्शन को लेकर चंडीगढ़ के सेक्टर-3 पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया था, जिसकी सुनवाई के लिए आज सभी नेता वहां एक साथ उपस्थित हुए थे।

अदालत में हुआ सियासी मिलाप

अदालत परिसर में जब प्रेम सिंह चंदूमाजरा और बिक्रम सिंह मजीठिया का आमना-सामना हुआ, तो चंदूमाजरा ने उन्हें 'माझे दे जरनैल साहब' कहकर संबोधित किया। इसके बाद दोनों नेता भीड़ से अलग एक कोने में जाकर बातचीत करने लगे। थोड़ी ही देर में सुरजीत सिंह रखड़ा भी उनके साथ शामिल हो गए। तीनों नेताओं के बीच काफी देर तक हंसी-मजाक और बेहद गर्मजोशी के साथ लंबी बातचीत का सिलसिला चलता रहा, जिसने सबको चौंका दिया।

चंदूमाजरा-रखड़ा ने बनाई थी पार्टी

चंदूमाजरा और रखड़ा ने सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व से नाराज होकर विद्रोह किया था और 'शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत)' नाम की नई पार्टी बनाई थी। दूसरी ओर बिक्रम सिंह मजीठिया हाल ही में आय से अधिक संपत्ति मामले में जमानत पर जेल से रिहा हुए हैं। जेल से बाहर आते ही उन्होंने स्पष्ट किया था कि वह पार्टी से नाराज होकर अलग हुए सभी पुराने साथियों को वापस लाने का पूरा प्रयास करेंगे।

अकालियों का एका किसे देगा टेंशन?

पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए सभी राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कस ली है। अकाली दल ने भी नए चेहरों की तलाश के साथ-साथ रूठे हुए नेताओं को मनाने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी नेतृत्व अच्छी तरह जानता है कि अगर 2022 की तरह इस बार भी बिखराव हुआ, तो भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

इसलिए चुनाव से पहले पार्टी में एकता कायम करने की हरसंभव कोशिश की जा रही है। दूसरी तरफ अकाली दलों का एका विरोधी पार्टियों के लिए चिंता का सबब बन सकता है। खासकर अकाली अकेले मजबूत हुए तो भाजपा से संभावित गठबंधन को झटका लग सकता है। इसके साथ ही आप और कांग्रेस के लिए भी यह टेंशन वाला हो सकता है।

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