ईडी रेड (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Money Laundering Case Haryana: प्रवर्तन निदेशालय ने भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए ₹597 करोड़ के बैंक घोटाले की परतों को खोलना शुरू कर दिया है। 12 मार्च 2026 को ईडी की टीमों ने चंडीगढ़, हरियाणा (पंचकुला और गुड़गांव), पंजाब के मोहाली और कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में कुल 19 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की।
इस कार्रवाई के दौरान घोटाले से संबंधित डिजिटल और दस्तावेजी सबूतों के साथ-साथ 90 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। यह पूरा मामला सरकारी खजाने में सेंध लगाकर जनता की गाढ़ी कमाई को निजी स्वार्थ के लिए हड़पने से जुड़ा है।
जांच में सामने आया है कि यह घोटाला हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ नगर निगम और अन्य सरकारी विभागों के खातों से संबंधित है। घोटालेबाजों की योजना के अनुसार, सरकारी विभागों की करीब ₹597 करोड़ की राशि को बैंक में एफडी के रूप में रखा जाना था। हालांकि, बैंक के कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों ने बाहरी लोगों के साथ मिलकर इस भारी-भरकम राशि का बिना किसी अनुमति के दुरुपयोग किया और उसे इधर-उधर कर दिया। सइस अनियमितता का खुलासा तब हुआ जब फरवरी 2026 में हरियाणा के विकास और पंचायत विभाग के बैंक खातों में शेष राशि का मिलान नहीं हुआ, जिसके बाद पुलिस ने एफआईआर (FIR) दर्ज की थी।
ईडी ने खुलासा किया है कि गबन किए गए पैसे को ठिकाने लगाने के लिए ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ जैसी कई फर्जी कंपनियां बनाई गई थीं। आरोपियों ने सरकारी धन को सबसे पहले इन फर्जी खातों में स्थानांतरित किया।
पैसे को ‘सफेद’ करने के लिए आरोपियों ने सावन ज्वैलर्स जैसे जौहरियों की मदद ली और फर्जी बिलों के जरिए सोना खरीदने का भ्रम पैदा किया। पिछले लगभग एक साल से बैंक के भीतर ही बैठे ‘भेड़ियों’ की मदद से इस पूरे खेल को अंजाम दिया जा रहा था।
इस महाघोटाले के मास्टरमाइंड के रूप में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व कर्मचारी रिभव ऋषि का नाम सामने आया है, जिसने जून 2025 में इस्तीफा देने से पहले और बाद में फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल कर बैंक के पैसों में हेराफेरी की।
इसमें उसकी पत्नी दिव्या अरोरा और एक अन्य कर्मचारी अभय कुमार भी शामिल थे। इसके अलावा, मोहाली के मशहूर होटल व्यवसायी और रियल एस्टेट डेवलपर विक्रम वाधवा पर भी गंभीर आरोप हैं। वाधवा ने सीधे अपने खातों में अपराध की कमाई प्राप्त की और उसे अपनी विभिन्न रियल एस्टेट कंपनियों जैसे प्रिस्मा रेजिडेंसी और मार्टेल बिल्डवेल में निवेश कर दिया। फिलहाल विक्रम वाधवा फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
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ईडी की जांच में ‘चंडीगढ़ मेगा स्टोर’ नामक संस्था की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जहां से बड़ी मात्रा में हेराफेरी कर धन निकाला गया था। स्टोर के पार्टनर मोहित गोयल को छापेमारी के दौरान पकड़ा गया है, जिससे महत्वपूर्ण सबूत बरामद हुए हैं। इसके अलावा, मां वैभव लक्ष्मी इंटीरियर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस जैसी संस्थाओं की भी जांच चल रही है, जिन्होंने सीधे सरकारी खातों से फंड प्राप्त किया था।