औने-पौने दाम में भारत का खनिज चीन को बेचा, ED ने जब्त की 1000 करोड़ की संपत्तियां
Goa Mining Scam: गोवा के कथित अवैध लौह अयस्क खनन और निर्यात मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने भारत और सिंगापुर में फैली 130 से अधिक संपत्तियों को किया सीज, शेल कंपनियों के जरिए चीन को निर्यात का आरोप।
- Written By: दिव्या सिंह
गोवा के कथित अवैध लौह अयस्क खनन (सोर्स- सोशल मीडिया)
Illegal Mining Case In Goa: गोवा में कथित अवैध लौह अयस्क खनन और निर्यात से जुड़े बहुचर्चित मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत 1,023.85 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त (Provisional Attachment) की हैं। यह कार्रवाई भारत के साथ-साथ सिंगापुर तक फैली हुई है, जिससे मामले की अंतरराष्ट्रीय कड़ियां भी सामने आई हैं।
ED के अनुसार, यह कार्रवाई गोवा स्थित सलगांवकर ग्रुप और उससे जुड़े AVS ग्रुप के खिलाफ की गई है। एजेंसी ने 19 जून को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत संपत्ति जब्ती का आदेश जारी किया था।
भारत और सिंगापुर में फैली संपत्तियां जब्त
जांच एजेंसी के मुताबिक, जब्त की गई संपत्तियों में भारत में स्थित 99 अचल संपत्तियां शामिल हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 459.10 करोड़ रुपये है। इसके अलावा सिंगापुर में मौजूद 31 अचल संपत्तियों को भी जब्त किया गया है, जिनका मूल्य करीब 471.32 करोड़ रुपये बताया गया है। भारतीय कंपनियों में 93.42 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर भी इस कार्रवाई के दायरे में आए हैं। इन सभी संपत्तियों का कुल मूल्य 1,023.85 करोड़ रुपये आंका गया है।
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गोवा पुलिस की FIR के बाद शुरू हुई जांच
ED ने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग की यह जांच गोवा पुलिस की CID शाखा द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की गई थी। जांच के दौरान एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों का भी उल्लेख किया, जिनमें 22 नवंबर 2007 के बाद गोवा में हुई कुछ खनन गतिविधियों को अवैध माना गया था।
एजेंसी का आरोप है कि 2007 से 2012 के बीच संबंधित समूह ने कई खनन पट्टों के माध्यम से बड़े पैमाने पर लौह अयस्क का अवैध खनन, बिक्री और निर्यात किया, जिससे हजारों करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई।
शेल कंपनियों के जरिए चीन तक पहुंचा लौह अयस्क
ED के अनुसार, कथित रूप से अवैध रूप से निकाले गए लौह अयस्क को ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI) में स्थापित शेल कंपनियों को कम कीमत पर निर्यात किया जाता था। बाद में इन्हीं कंपनियों के माध्यम से इस खनिज को चीन में अधिक कीमत पर बेचा जाता था, जिससे भारी मुनाफा अर्जित किया गया।
जांच एजेंसी का दावा है कि इस प्रक्रिया के जरिए हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ कमाया गया और धन को विभिन्न विदेशी संस्थाओं के माध्यम से घुमाकर संपत्तियों में निवेश किया गया।
5,237 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का आरोप
ED के मुताबिक, मामले में अपराध से अर्जित कुल आय (Proceeds of Crime) का अनुमान 5,237.84 करोड़ रुपये लगाया गया है। एजेंसी का आरोप है कि इन फंड्स का उपयोग विदेशों में संपत्तियां खरीदने, निवेश करने और कुछ धनराशि को विभिन्न माध्यमों से वापस भारत लाने के लिए किया गया।
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फिलहाल मामले की जांच जारी है और आने वाले समय में इस प्रकरण में और भी कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
